नौकरी ढूंढने वाले नहीं, एआई के दौर में 'सीईओ' बनेंगे भारतीय बच्चे: शेखर कपूर
मुंबई, 1 मई (आईएएनएस)। मशहूर फिल्म निर्देशक शेखर कपूर अक्सर सोशल मीडिया के जरिए समाजिक और तकनीकी बदलावों पर अपनी राय रखते रहते हैं। शुक्रवार को उन्होंने एआई के बढ़ते प्रभाव और भारती मध्यमवर्गीय परिवारों पर इसके असर को लेकर अपने विचार व्यक्त किए।
निर्देशक ने इंस्टाग्राम पर एक सामान्य भारतीय परिवार की तस्वीर पोस्ट की, जिसमें रोजमर्रा के काम होते दिख रहे है। एक कमरे के अंदर मां खाना बना रही है जबकि उसका पति चारपाई पर बैठकर टीवी देख रहा है और बच्चे जमीन पर बैठकर लैपटॉप चला रहे हैं।
शेखर ने इस तस्वीर को देखते हुए तर्क दिया कि जहां दुनिया की नजरें पश्चिमी देशों के बड़े निवेश और कंपनियों की वैल्यूएशन पर टिकी है। वहीं, असली एआई क्रांति भारत के साधारण घरों से शुरू होगी। उन्होने लिखा, "यह क्रांति 'ऊपर' (कॉरपोरेट जगत) से नहीं, बल्कि 'नीचे' (आम जनता) से आएगी। एआई शायद अब तक की सबसे लोकतांत्रिक (सबके लिए खुली) तकनीक बन सकती है।"
उन्होंने बताया कि एआई कोडिंग, डिजाइन, रिसर्च और स्वास्थ्य जैसे तकनीकी काम संभालने लगेगी, तब इंसान के पास उसकी सबसे बड़ी ताकत सोचने और समझने की शक्ति बचेगी। निर्देशक ने लिखा, "जहां संघर्ष होता है, वहीं नई सोच पैदा होती है। भारत की असली ताकत यहां की जरूरत और मेहनत है।"
शेखर कपूर ने भविष्य की एक सुनहरी तस्वीर पेश करते हुए बताया कि एआई कैसे रिश्तों और करियर की परिभाषा बदल देगा। उन्होंने लिखा, "भविष्य के बच्चे सिर्फ नौकरी ढ़ंढने वाले नहीं बल्कि खुद सीईओ बनेंगे। रिटायर हो चुके पिता अपने अनुभव का उपयोग नई तकनीक के जरिए फिर से कर सकेंगे। घर की जिम्मेदारियों के बीच माताएं भी अपनी रचनात्मकता को वैश्विक मंच पर ले जा सकेंगी।"
उन्होंने अपनी बात को खत्म करते हुए लिखा, "भारत एआई के लिए इसलिए तैयार नहीं है कि हमारे पास बहुत महंगे सिस्टम हैं बल्कि इसलिए क्योंकि हमारे पास बड़ी जनसंख्या, रचनात्मक सोच और संघर्ष से उपजी जरूरतें हैं।"
--आईएएनएस
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