Nana Patekar: एक करोड़ फीस से लेकर प्रोड्यूसर से बर्तन धुलवाने तक, परेश रावल ने सुनाए थे अनोखे किस्से
दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन से भारतीय सिनेमा को बड़ा झटका लगा है। 75 साल की उम्र में गोवा स्थित अपने घर पर कार्डियक अरेस्ट के बाद उनका निधन हुआ। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।
नाना पाटेकर सिर्फ अपनी दमदार अदाकारी के लिए ही नहीं, बल्कि अपने बेबाक और अलग अंदाज के लिए भी जाने जाते थे। उनके साथ काम कर चुके अभिनेता परेश रावल ने 2025 में एक बातचीत के दौरान नाना से जुड़े कुछ ऐसे किस्से साझा किए थे, जो उनके अलग व्यक्तित्व की झलक देते हैं।
एक करोड़ रुपये की फीस ने मचा दिया था हंगामा
परेश रावल ने लल्लनटॉप के साथ बातचीत में बताया था कि नाना पाटेकर ने एक दौर में एक फिल्म के लिए एक करोड़ रुपये की फीस मांगी थी। उस समय इतनी रकम मांगना बड़ी बात मानी जाती थी और कथित तौर पर बड़े अभिनेता भी इस तरह की फीस मांगने में संकोच करते थे।
परेश के मुताबिक, नाना ने अपनी फीस को लेकर समझौता नहीं किया और आखिरकार उन्हें वह रकम मिली भी। यह किस्सा इस बात का उदाहरण था कि नाना खुद को पारंपरिक हीरो की श्रेणी में रखे बिना भी अपनी अभिनय क्षमता और स्टार वैल्यू के दम पर अपनी शर्तों पर काम करते थे।
प्रोड्यूसर को घर बुलाकर कराया था ऐसा काम
परेश रावल ने नाना के स्वभाव से जुड़ा एक और मजेदार किस्सा भी सुनाया था। उनके मुताबिक, एक प्रोड्यूसर को नाना ने अपने घर खाने पर बुलाया था। वहां उन्हें खाना खिलाने के बाद नाना ने कथित तौर पर उनसे बर्तन साफ करने के लिए कहा।
परेश रावल ने इस घटना को नाना के अनोखे अंदाज से जोड़ते हुए कहा था कि वह बाकी लोगों से बिल्कुल अलग थे। उन्होंने इसी संदर्भ में नाना को बेहद खास और अपने तरीके का इंसान बताया था।
चार दशक से ज्यादा लंबा रहा शानदार करियर
नाना पाटेकर ने 1978 में फिल्म ‘गमन’ से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने हिंदी और मराठी सिनेमा में कई यादगार भूमिकाएं निभाईं। ‘सलाम बॉम्बे!’, ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अग्नि साक्षी’ और ‘खामोशी: द म्यूजिकल’ जैसी फिल्मों ने उनकी अभिनय क्षमता को अलग पहचान दिलाई।
उनकी अभिनय प्रतिभा को राष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मान मिला। उन्हें तीन नेशनल फिल्म अवॉर्ड सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिले और 2013 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया।
गंभीर किरदारों से कॉमेडी तक छोड़ी अपनी छाप
नाना पाटेकर की खासियत यह थी कि उन्होंने खुद को किसी एक तरह के किरदार तक सीमित नहीं रखा। ‘अब तक छप्पन’ और ‘अपहरण’ जैसी गंभीर फिल्मों में उनके अभिनय को खूब सराहा गया, वहीं ‘वेलकम’ और ‘वेलकम बैक’ जैसी फिल्मों में उनके कॉमिक अंदाज ने दर्शकों को खूब मनोरंजन किया।
उनकी संवाद अदायगी, आवाज और स्क्रीन प्रेजेंस इतनी अलग थी कि छोटे या सपोर्टिंग रोल में भी वह आसानी से दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींच लेते थे।
नाना का अलग अंदाज हमेशा याद रहेगा
नाना पाटेकर का फिल्मी सफर सिर्फ सफल फिल्मों और पुरस्कारों तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने अभिनय की ऐसी शैली विकसित की, जिसमें किरदार की गहराई और संवादों की प्रभावशीलता दोनों नजर आती थीं।
उनके निधन के बाद उनके पुराने किस्से और फिल्मों के किरदार एक बार फिर चर्चा में हैं। परेश रावल द्वारा सुनाए गए ये किस्से भी नाना के उस व्यक्तित्व की झलक देते हैं, जो उन्हें फिल्म इंडस्ट्री के दूसरे कलाकारों से अलग बनाता था।