हलक में हाथ डालकर कलेजा खींच लूंगा हरामखोर, पढ़ें सनी देओल के ये मशहूर डायलॉग
बॉलीवुड के एक्शन अभिनेता सनी देओल फिल्मों में अपने शानदार अभिनय के बाद अब राजनीति पारी खेलने जा रहे हैं। पिछले कई दिनों से सनी देओल के राजनीति में आने को लेकर चर्चा हो रही थी लेकिन अब फाइनली उन्होंने राजनीति में कदम रख लिया है। खबर है कि सनी देओल पंजाब की गुरदासपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं। सनी देओल बॉलीवुड के ऐसे अभिनेता हैं जिन्होंने एक से बढ़कर एक मशहूर फिल्मों में काम किया है। उनकी हर फिल्मों में शानदार डायलॉग होते हैं। सनी देओल के फैंस उनके डायलॉग्स को कभी नहीं भूल सकते हैं। फिल्म दामिनी का उनका डायलॉग तारीख पर तारीख और ढाई किलो के हाथ को शायद ही कोई भूल सकता है। आज हम आपको सनी देओल की कुछ फिल्मों के मशहूर डायलॉग लेकर आए हैं।
घातक (1996)— हलक में हाथ डालकर कलेजा खींच लूंगा हरामख़ोर.. उठा उठा के पटकूंगा। उठा उठा के पटकूंगा! चीर दूंगा, फाड़ दूंगा साले।
घायल (1990)— इस चोट को अपने दिल-ओ-दिमाग़ पर कायम रखना। कल यही आंसू क्रांति का सैलाब बनकर, इस मुल्क की सारी गंदगी को बहा ले जाएंगे।
घातक (1996)— ये मजदूर का हाथ है कात्या, लोहा पिघलाकर उसका आकार बदल देता है। ये ताकत खून-पसीने से कमाई हुई रोटी की है। मुझे किसी के टुकड़ों पर पलने की जरूरत नहीं।
दामिनी (1993)— चड्ढा, समझाओ.. इसे समझाओ। ऐसे खिलौने बाजार में बहुत बिकते हैं, मगर इसे खेलने के लिए जो जिगर चाहिए न, वो दुनिया के किसी बाजार में नहीं बिकता, मर्द उसे लेकर पैदा होता है और जब ये ढाई किलो का हाथ किसी पर पड़ता है न तो आदमी उठता नहीं, उठ जाता है।
गदर: एक प्रेम कथा (2001)— अशरफ अली! आपका पाकिस्तान जिंदाबाद है, इससे हमें कोई ऐतराज नहीं लेकिन हमारा हिंदुस्तान ज़िंदाबाद है, ज़िंदाबाद था और ज़िंदाबाद रहेगा, बस बहुत हो गया।
दामिनी (1993)— सच्चाई के लिए लड़ने वाला रहेगा, न ही इंसाफ मांगने वाला। रह जाएगी तो सिर्फ तारीख और यही होता रहा है मीलॉर्ड तारीख पर तारीख, तारीख पर तारीख, तारीख पर तारीख मिलती रही है मीलॉर्ड लेकिन इंसान नहीं मिला मीलॉर्ड, इंसाफ नहीं मिला। मिली है तो सिर्फ ये तारीख।
घातक (1996)— पिंजरे में आकर शेर भी कुत्ता बन जाता है कात्या। तू चाहता है मैं तेरे यहां कुत्ता बनकर रहूं, तू कहे तो काटूं, तू कहे तो भौंकू।
दामिनी (1993)— अगर अदालत में तूने कोई बदतमीजी की तो वहीं मारूंगा। जज ऑर्डर ऑर्डर करता रहेगा और तू पिटता रहेगा।
जिद्दी (1997)— चिल्लाओ मत इंस्पेक्टर, ये देवा की अदालत है, और मेरी अदालत में अपराधियों को ऊंचा बोलने की इजाज़त नहीं।