स्टूडेंट प्रोटेस्ट पर कंगना रनोट और सौरव दास आमने-सामने, वीडियो में जाने बयानबाजी से गरमाई सियासत
छात्र आंदोलनों को लेकर जारी बहस के बीच अभिनेत्री और सांसद कंगना रनोट तथा कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर तीखे शब्दों में निशाना साधा, जिसके बाद यह विवाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा का विषय बन गया। यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने कंगना रनोट के छात्र आंदोलनों पर दिए गए बयानों की आलोचना की। उन्होंने दावा किया कि कंगना के विचारों को उनकी अपनी पार्टी में भी गंभीरता से नहीं लिया जाता, इसलिए आम लोगों को भी उन्हें गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है।
सौरव दास ने क्या कहा?
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में सौरव दास ने कहा कि कंगना रनोट के छात्र आंदोलनों पर दिए गए बयान युवाओं की सोच का प्रतिनिधित्व नहीं करते। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी, विशेषकर जेन-जी और जेन-अल्फा, उन्हें गंभीरता से नहीं लेती।सौरव दास ने कहा कि यदि उनकी अपनी पार्टी भी उनके बयानों को अधिक महत्व नहीं देती, तो विपक्ष या आम जनता से ऐसा करने की अपेक्षा नहीं की जा सकती।
कंगना रनोट का पलटवार
सौरव दास के बयान पर कंगना रनोट ने सोशल मीडिया के जरिए तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि उन्होंने सौरव की उम्र के बारे में जानकारी ली और सवाल उठाया कि 28 वर्ष का व्यक्ति खुद को छात्र कैसे बता सकता है।कंगना ने अपनी सार्वजनिक उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि वह पिछले दो दशकों से सार्वजनिक जीवन का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि सौरव की मौजूदा उम्र तक पहुंचने से पहले ही वह दो राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीत चुकी थीं।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि राजनीति में आए उन्हें अभी दो वर्ष ही हुए हैं, लेकिन एक सांसद होने के साथ-साथ वह फिल्म निर्माता, अभिनेत्री, निर्माता, पटकथा लेखिका और उद्यमी की जिम्मेदारियां भी निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि नई सांसद होने के कारण शुरुआती दौर में काम का दबाव अधिक महसूस हुआ, लेकिन वह अपनी जिम्मेदारियों का पूरी निष्ठा से निर्वहन कर रही हैं।
छात्र आंदोलनों को लेकर जारी है बहस
छात्र आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों को लेकर हाल के दिनों में राजनीतिक दलों के बीच लगातार बयानबाजी देखने को मिल रही है। एक ओर कुछ नेता इन आंदोलनों को छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकार का हिस्सा बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ नेताओं का कहना है कि विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण और कानून के दायरे में होने चाहिए।इसी मुद्दे पर कंगना रनोट के बयानों और सौरव दास की प्रतिक्रिया ने विवाद को और बढ़ा दिया है।
सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस
दोनों नेताओं के बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी समर्थकों और विरोधियों के बीच बहस तेज हो गई है। एक पक्ष कंगना रनोट के जवाब का समर्थन कर रहा है, जबकि दूसरा पक्ष सौरव दास के बयान को सही ठहरा रहा है।फिलहाल यह विवाद राजनीतिक और सोशल मीडिया दोनों मंचों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में दोनों पक्षों की ओर से इस मुद्दे पर और प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।