जब राजीव गांधी को फिल्म के लिए साइन करना चाहते थे महमूद, झट से निकाल लिए थे 5 हजार रुपए
मुंबई, 28 सितंबर (आईएएनएस)। हिंदी सिनेमा में महमूद उन सितारों में शामिल थे, जिनकी मौजूदगी से फिल्म में जान आ जाती थी। उन्होंने कॉमेडी से एक अलग पहचान बनाई। उनका करियर कई दशकों तक चला और इस दौरान उन्होंने एक्टिंग के साथ-साथ फिल्म निर्माण और निर्देशन में भी हाथ आजमाया। महमूद की जिंदगी से जुड़े कई दिलचस्प किस्से हैं।
ऐसा ही एक किस्सा अमिताभ बच्चन और राजीव गांधी से जुड़ा है, जब महमूद ने अमिताभ के साथ आए एक युवा को देखकर उसे अपनी अगली फिल्म के लिए साइन करने के इरादे से 5 हजार रुपए तक दे दिए थे। उन्हें बाद में पता चला कि वह कोई फिल्मी कलाकार नहीं, बल्कि राजीव गांधी थे। इस किस्से का जिक्र लेखक हनीफ जावेरी की किताब 'महमूद: ए मैन ऑफ मैनी मूड' में मिलता है।
महमूद अली का जन्म 29 सितंबर 1932 को बॉम्बे यानी आज के मुंबई में हुआ था। उनके पिता मुमताज अली अपने समय के जाने-माने डांसर और एक्टर थे। घर में फिल्मी माहौल था, लेकिन महमूद का बचपन आसान नहीं रहा। परिवार में आर्थिक परेशानी आई तो उन्हें छोटी उम्र से ही काम करना पड़ा। उन्होंने बतौर बाल कलाकार 1943 की फिल्म 'किस्मत' से बॉलीवुड में कदम रखा। आगे चलकर उन्होंने कई तरह के छोटे-मोटे काम भी किए और एक समय फिल्ममेकर पी.एल. संतोषी के ड्राइवर के तौर पर भी काम किया।
धीरे-धीरे महमूद को फिल्मों में मौके मिलने लगे। 'दो बीघा जमीन' और 'प्यासा' जैसी फिल्मों में उन्होंने छोटे रोल किए। 1958 में आई 'परवरिश' उनके करियर का बड़ा मोड़ बनी, जिसमें उन्होंने राज कपूर के भाई का किरदार निभाया। इसके बाद वह लगातार फिल्मों में नजर आने लगे। 1960 और 70 के दशक में उनकी कॉमेडी ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई। 'गुमनाम', 'प्यार किए जा', 'पड़ोसन', 'बॉम्बे टू गोवा', 'दो फूल', 'कुंवारा बाप' और 'सबसे बड़ा रुपैया' जैसी फिल्मों में उनके काम को खूब पसंद किया गया। 'पड़ोसन' में मास्टर पिल्लई का किरदार आज भी उनकी सबसे यादगार भूमिकाओं में गिना जाता है।
महमूद की खास बात यह थी कि वह सिर्फ कमीडियन बनकर नहीं रहे। वह फिल्म के पोस्टर और क्रेडिट में भी दर्शकों के लिए बड़ा आकर्षण बन चुके थे। उनके भाई अनवर अली ने एक इंटरव्यू में बताया था कि एक समय ऐसा भी आया जब उनकी मौजूदगी से फिल्म के डिस्ट्रीब्यूटर उत्साहित हो जाते थे। महमूद ने कई नए कलाकारों की प्रतिभा को भी पहचाना। इस कड़ी में उन्होंने अमिताभ बच्चन को भी 'बॉम्बे टू गोवा' में बड़ा मौका दिया।
उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने चार फिल्मफेयर अवॉर्ड जीते। इनमें 'प्यार किए जा', 'वारिस' और 'वरदान' के लिए बेस्ट कमीडियन का अवॉर्ड शामिल था। वह फिल्म इंडस्ट्री में सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले कॉमेडी कलाकारों में गिने जाने लगे और चार दशकों से ज्यादा के करियर में 300 से ज्यादा फिल्मों का हिस्सा रहे।
लेखक हनीफ जवेरी की किताब के मुताबिक, 'बॉम्बे टू गोवा' की रिलीज से कुछ समय पहले अमिताभ बच्चन दिल्ली से आए अपने एक युवा दोस्त को मुंबई लेकर आए थे। इस युवा दोस्त को देख महमूद को लगा कि यह लड़का अमिताभ से भी ज्यादा स्मार्ट और आकर्षक है और आगे चलकर इंटरनेशनल स्टार बन सकता है।
महमूद ने 5 हजार रुपए निकाले और अनवर अली को देते हुए कहा कि इसे अमिताभ के दोस्त को दे दो। उनका इरादा उस युवा को अपनी अगली फिल्म के लिए साइन करना था। अनवर को कुछ समझ नहीं आया। इसके बाद उन्होंने महमूद को बताया कि वह युवा कोई नया एक्टर नहीं, बल्कि राजीव गांधी हैं, जो तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बेटे हैं। यह सुनकर महमूद ने पैसे वापस ले लिए। अमिताभ और राजीव गांधी दोनों इस बात पर हंस पड़े।
बाद में जब राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री बने तो अमिताभ ने मजाकिया अंदाज में कहा था कि महमूद की बात आखिर सच निकली, राजीव सच में इंटरनेशनल स्टार बने, लेकिन फिल्मी दुनिया में नहीं, राजनीति में।
महमूद का निधन 71 साल की उम्र में 23 जुलाई 2004 को अमेरिका के पेंसिल्वेनिया में हुआ था।
--आईएएनएस
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