'गलत-सही की चिंता छोड़िए, बस बोलिए…' जब प्रियदर्शन की सलाह ने बदल दी वीरेंद्र सहवाग की अंग्रेजी
मुंबई, 29 जुलाई (आईएएनएस)। मशहूर निर्देशक प्रियदर्शन ने पूर्व भारतीय क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया कि एक समय ऐसा था जब सहवाग अंग्रेजी बोलने में काफी झिझक महसूस करते थे। ऐसे में उन्होंने उन्हें सिर्फ एक सलाह दी थी- 'गलत या सही की चिंता मत करो, बस बोलते रहो।' दिलचस्प बात यह रही कि यही छोटी-सी सीख आगे चलकर सहवाग का आत्मविश्वास बढ़ाने का कारण बनी।
बातचीत के दौरान अभिनेता अक्षय कुमार ने भी भाषा को लेकर अपनी सोच साझा करते हुए बताया कि उन्होंने हमेशा अपनी सहज भाषा हिंदी को ही प्राथमिकता दी है।
आईएएनएस से बात करते हुए प्रियदर्शन ने कहा, ''एक विज्ञापन की शूटिंग के दौरान मेरी मुलाकात वीरेंद्र सहवाग से हुई थी। उस समय सहवाग अंग्रेजी बोलने को लेकर काफी संकोच महसूस कर रहे थे। उन्हें डर था कि कहीं कोई गलती न हो जाए। मैंने महसूस किया कि भाषा से ज्यादा समस्या उनके आत्मविश्वास की है। ऐसे में मैंने सहवाग को एक बेहद आसान सलाह दी।''
प्रियदर्शन ने कहा, ''मैंने सहवाग से कहा, 'सही बोलो या गलत, बस बोलते रहो,' क्योंकि मेरा मानना है कि जब तक कोई व्यक्ति बोलने का अभ्यास नहीं करेगा, तब तक वह किसी भी भाषा में सहज नहीं हो पाएगा। गलती करने का डर ही लोगों को आगे बढ़ने से रोकता है।''
उन्होंने आगे बताया, ''करीब दो साल बाद जब मेरी फिर से वीरेंद्र सहवाग से मुलाकात हुई तो वह पहले की तुलना में काफी अच्छे से अंग्रेजी बोलने लगे थे। सहवाग ने मुझसे कहा कि मैंने मजबूरी में अंग्रेजी बोलना शुरू किया और धीरे-धीरे यही अभ्यास मेरी ताकत बन गया। लगातार बोलने की आदत ने मेरा आत्मविश्वास बढ़ा और भाषा पर मेरी पकड़ भी मजबूत होती चली गई।''
प्रियदर्शन ने इस अनुभव के जरिए बताया कि भाषा सीखने का सबसे बड़ा मंत्र अभ्यास है। उन्होंने कहा, ''यदि कोई व्यक्ति हमेशा यही सोचता रहेगा कि वह अंग्रेजी नहीं बोल सकता या उससे गलती हो जाएगी, तो वह कभी उस डर से बाहर नहीं निकल पाएगा। मैं खुद हिंदी को अच्छी तरह समझता हूं। मैंने दसवीं कक्षा तक हिंदी की पढ़ाई भी की है, इसलिए हिंदी पढ़ और लिख सकता हूं, लेकिन बिना रुकावट बोल नहीं सकता। इसके बावजूद मैं हिंदी में बात करने से पीछे नहीं हटता।''
प्रियदर्शन का कहना है, ''किसी भी भाषा में निपुण होने के लिए सबसे जरूरी चीज है आत्मविश्वास। अगर व्यक्ति गलतियों से डरने के बजाय उन्हें सीखने का हिस्सा मान ले, तो धीरे-धीरे भाषा पर उसकी पकड़ अपने आप मजबूत हो जाती है। भाषा का उद्देश्य केवल अपने विचार सामने रखना है, न कि दूसरों को प्रभावित करना।''
इसी बातचीत के दौरान अभिनेता अक्षय कुमार ने भी भाषा को लेकर अपनी सोच साझा की। उन्होंने कहा, ''मैंने हमेशा हिंदी को प्राथमिकता दी है। 90 के दशक में भी, जब अंग्रेजी बोलना ज्यादा प्रभावशाली माना जाता था, तब भी मैंने सार्वजनिक मंचों पर हिंदी में ही बात करना पसंद किया। चाहे कोई अवॉर्ड शो हो या कोई बड़ा कार्यक्रम, मैंने हमेशा हिंदी में बोलना चुना। कई ऐसे मंच भी आए, जहां ज्यादातर लोग अंग्रेजी में बात करते थे, लेकिन मैं हाथ जोड़कर पहले ही कह देता था कि सामने वाला अंग्रेजी में बोल सकता है, लेकिन वह अपनी बात हिंदी में ही रखेंगे क्योंकि यही उनकी सबसे सहज भाषा है।''
--आईएएनएस
पीके/एएस