सुमन कल्याणपुर की अंतिम विदाई, फिल्म और संगीत जगत से श्रद्धांजलि देने पहुंचे सिर्फ सुरेश वाडकर
मुंबई, 1 जून (आईएएनएस)। भारतीय संगीत जगत की दिग्गज और पद्म भूषण से सम्मानित पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर का सोमवार को अंतिम संस्कार किया गया, लेकिन संगीत और फिल्म उद्योग से जुड़े लोग उनके अंतिम विदाई समारोह में अनुपस्थित रहे। केवल पार्श्व गायक सुरेश वाडकर ही दिवंगत आत्मा को अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचे।
सुमन कल्याणपुर का अंतिम संस्कार सोमवार को पवन हंस श्मशान घाट में हुआ। उनके परिवार में उनकी बेटी चारू हैं। गायिका को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई और उनके पार्थिव शरीर को तिरंगे में लपेटा गया।
खबरों के अनुसार, गायिका का निधन रविवार को लोखंडवाला स्थित उनके आवास पर वृद्धावस्था के कारण हुआ।
सुमन कल्याणपुर भारतीय सिनेमा की सबसे सम्मानित पार्श्व गायिकाओं में से एक थीं, जो अपनी सुरीली आवाज और कई दशकों तक लंबे करियर के लिए जानी जाती थीं। उनका जन्म 28 जनवरी, 1937 को हुआ था, और उन्होंने 1950 और 1960 के दशक में हिंदी, मराठी और कई अन्य भारतीय भाषाओं में गाने गाकर प्रसिद्धि हासिल की।
उन्होंने शंकर-जयकिशन, ओपी नैयर और कल्याणजी-आनंदजी जैसे प्रमुख संगीतकारों के साथ काम किया। मोहम्मद रफी के साथ उनके युगल गीत विशेष रूप से लोकप्रिय हुए, जिनसे ऐसे यादगार गीत बने जो आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में बसे हुए हैं।
भारतीय संगीत की दिग्गज हस्तियों लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी के बीच हुए मतभेद के बाद उन्होंने तेजी से प्रसिद्धि हासिल की।
उनकी आवाज अपनी मधुरता, स्पष्टता और भावनात्मक गहराई के लिए जानी जाती थी। प्लेबैक सिंगिंग के स्वर्णिम युग में दिग्गज समकालीनों के साथ काम करने के बावजूद उन्होंने अपनी बहुमुखी प्रतिभा और त्रुटिहीन गायन शैली के माध्यम से एक अलग पहचान बनाई। उन्होंने हिंदी, मराठी, असमिया, कन्नड़ और बंगाली सहित कई भाषाओं में गीत गाए। उन्होंने भक्ति गीत और गजलें भी गाईं। भारतीय फिल्म संगीत के प्रशंसक आज भी उनके योगदान को सराहते हैं।
--आईएएनएस
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