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फ्रेंडशिप डे: करण जौहर ने दोस्ती पर लिखा इमोशनल नोट, बोले- दोस्त ही हैं मेरी सबसे बड़ी दौलत

 

मुंबई, 2 अगस्त (आईएएनएस)। बॉलीवुड के मल्टी-टैलेंटेड फिल्ममेकर करण जौहर ने फ्रेंडशिप डे के मौके पर अपनी जिंदगी को आकार देने वाली दोस्तियों को याद किया और बताया कि कैसे उनके दोस्तों ने हमेशा उन्हें सोचने की नई दिशा दी और खुद के लिए जगह बनाने के लिए प्रेरित किया।

करण जौहर ने इंस्टाग्राम पर एक लंबा नोट लिखा और अपनी जिंदगी में आए अलग-अलग दोस्तों के बारे में बात की। उन्होंने लिखा, "मैं 7 साल का प्लस साइज का बच्चा अपनी बिल्डिंग की खिड़की से बाहर देखा करता था। सच कहूं तो मैं खुद के लिए अच्छे शब्द इस्तेमाल कर रहा हूं। मैं लड़कों को गली क्रिकेट खेलते देखता था और मेरा पहला सवाल होता था - हॉपस्कॉच नेशनल स्पोर्ट क्यों नहीं हो सकता? हां मैं जेन एक्स हूं, हमारे समय में ये होता था। मैं न दौड़ लगा सकता था और न ही भाग सकता था। मेरा दूसरा सवाल था मेरे कोई दोस्त क्यों नहीं हैं? इकलौता बच्चा होने का सबसे बड़ा तोहफा मुझे मिला - खुद पर तरस खाना। तो जब मैं अपने साई भजी की समस्याओं पर पछता रहा था, सभी सिंधी इस रेफरेंस को समझेंगे, तभी मेरी जिंदगी में एक फरिश्ता आई - एक मिलनसार पारसी लड़की फरजाना मंचेरजी।"

उन्होंने आगे बताया, "उसने मुझे मेरी सुस्ती से बाहर निकाला और मुझे एहसास दिलाया कि मैं एक हाइपर ड्रामेटिक ड्रामा क्वीन हूं और मुझे बस अपने बेडरूम से बाहर निकलकर अपने लिए एक नई जगह बनानी है। वो मेरी पहली दोस्त थी। और यहीं से मेरी दोस्ती का सफर शुरू हुआ। 47 साल बाद भी फरजाना आज मेरे दिल का बहुत बड़ा हिस्सा है।"

करण ने अपनी दूसरी दोस्ती के बारे में भी बताया जिसने उन्हें व्यक्तिगत और प्रोफेशनल दोनों तौर पर परिभाषित किया। उन्होंने शेयर किया, "मेरी दूसरी उम्रभर की दोस्ती तब हुई जब मैं 6वीं सी में आया। मैं हमेशा 2ए, 3ए, 4ए, 5ए का बच्चा रहा था लेकिन एक सेक्रेटेरियल गलती की वजह से मुझे सी सेक्शन में डाल दिया गया। मैं किसी को नहीं जानता था। मैं फिर अकेला था। सेल्फ पिटी प्रो मैक्स वापस आ गया था। मेरी प्रिंसिपल ने मुझे क्लास के सामने खड़ा किया और शर्मिंदगी के साथ क्लास से पूछा, करण जौहर का दोस्त कौन बनेगा? सन्नाटा। फिर से पूछा। और तभी मणिरत्नम वाली बैकलाइट के साथ एक हाथ ऊपर उठा। उसका नाम था अपूर्व मेहता। आज वो मेरे बॉस, बेस्ट फ्रेंड और धर्मा के सीईओ हैं। उसने कहा कल से वेज स्नैक्स लाना। जाहिर है यही एकमात्र क्राइटेरिया था। उसके बाद उसने मुझे बहुत दोस्त बनाने में मदद की और मुझे एहसास हुआ कि मुझे अपने कॉम्प्लेक्स - वजन, नजाकत, मुंहासे - से ऊपर उठना होगा और खुद को अपनाना होगा, तभी लोग मुझे अपनाएंगे।"

करण ने कहा, "मुझे लगता है बात इतनी ही सीधी थी। आज मेरे दोस्त ही मेरा परिवार हैं। मैं दुनिया का सबसे खुशनसीब इंसान हूं जिसे इतने अच्छे दोस्त मिले हैं। हाल ही में मैं 15 दिन तक आईसीयू में अपनी मां के साथ था। वो अब घर वापस आ गई हैं और ठीक हैं। तब मुझे एहसास हुआ कि मेरे पास कितना प्यार है। आपकी दौलत चाहे जो भी हो, एकमात्र निवेश जो हमेशा आपको सबसे ज्यादा रिटर्न देगा वो है दोस्ती।"

उन्होंने अंत में लिखा, "मैं अपने सभी दोस्तों का शुक्रिया करता हूं जो मेरे मुश्किल दिनों और रातों में मेरे साथ रहे। मैं तुम सभी से बहुत प्यार करता हूं और तुम जानते हो तुम कौन हो। तुम सभी के लिए मेरी मोहब्बत और वफादारी उम्रभर रहेगी।"

--आईएएनएस

डीएससी