'हजारों ख्वाहिशें ऐसी' की मासूम गीता से 'खाकी' की दबंग नेता तक, हर रंग में माहिर हैं चित्रांगदा
नई दिल्ली, 29 अगस्त (आईएएनएस)। हिंदी सिनेमा में कुछ कलाकार ऐसे भी हैं, जिन्होंने अपनी पहली ही फिल्म से लोगों के दिलों में जगह बना ली। चित्रांगदा सिंह भी ऐसी ही अभिनेत्री हैं। पर्दे पर उनकी मौजूदगी जितनी खूबसूरत लगती है, उनके किरदारों में उतनी ही गहराई भी दिखाई देती है। कभी उन्होंने 'हजारों ख्वाहिशें ऐसी' में संवेदनशील और मासूम गीता बनकर दर्शकों का दिल जीता, तो कभी ‘बाजार’, 'बॉब बिस्वास' और 'गैसलाइट' जैसे प्रोजेक्ट्स में अलग-अलग रंग दिखाए। हाल के वर्षों में 'खाकी: द बंगाल चैप्टर' में एक प्रभावशाली राजनीतिक किरदार निभाकर उन्होंने फिर साबित किया कि वह सिर्फ ग्लैमर तक सीमित अभिनेत्री नहीं हैं।
चित्रांगदा सिंह का जन्म 30 अगस्त 1976 को हुआ था। उनका बचपन मेरठ, कोटा और बरेली जैसे शहरों में बीता। उनके पिता सेना में अधिकारी थे, इसलिए परिवार को अलग-अलग जगहों पर रहना पड़ा। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने मॉडलिंग की दुनिया में कदम रखा। धीरे-धीरे उन्हें विज्ञापनों और म्यूजिक वीडियो में काम मिलने लगा। गुलजार के म्यूजिक वीडियो ‘सनसेट प्वाइंट’ में नजर आने के बाद उन्होंने लोगों का ध्यान खींचा। इसके बाद उनके लिए फिल्मों का रास्ता खुला।
साल 2005 में निर्देशक सुधीर मिश्रा की फिल्म ‘हजारों ख्वाहिशें ऐसी’ से चित्रांगदा ने बॉलीवुड में कदम रखा। फिल्म में उन्होंने गीता का किरदार निभाया था। कॉलेज की छात्रा और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में उनका किरदार बेहद संवेदनशील था। चित्रांगदा ने इसे इतनी सहजता से निभाया कि दर्शकों और आलोचकों दोनों ने उनकी तारीफ की। पहली ही फिल्म के लिए उन्हें बेस्ट फीमेल डेब्यू का अवॉर्ड भी मिला।
लेकिन बॉलीवुड में पहली फिल्म की सफलता के बाद सब कुछ आसान नहीं रहा। उनकी अगली फिल्म 'कल: यस्टरडे एंड टुमारो' उम्मीद के मुताबिक नहीं चली। इसके बाद उन्होंने कुछ समय फिल्मों से दूरी बनाई। 2008 में ‘सॉरी भाई!’ से वापसी की, लेकिन यह फिल्म भी बॉक्स ऑफिस पर खास कमाल नहीं कर पाई। इसके बाद फिर एक ब्रेक आया।
फिर आया 2011, जिसने चित्रांगदा के करियर को एक नई दिशा दी। सुधीर मिश्रा की ‘ये साली जिंदगी’ में उन्होंने इरफान खान के साथ काम किया। क्लब सिंगर प्रीति के किरदार में उनका अंदाज काफी अलग था। इसी साल वह अक्षय कुमार के साथ ‘देसी बॉयज’ में भी नजर आईं। यहां उनका किरदार ग्लैमरस था और फिल्म ने उन्हें बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचाया।
इसके बाद चित्रांगदा ने लगातार अलग-अलग तरह के किरदार आजमाए। 'इंकार' में उन्होंने महत्वाकांक्षी माया का किरदार निभाया, जबकि 'आई, मी और मैं' में वह करियर को लेकर गंभीर महिला के रूप में नजर आईं। उन्होंने खुद को किसी एक तरह के किरदार में बांधकर नहीं रखा। कभी वह स्पेशल अपीयरेंस में दिखीं, तो कभी डांस नंबर का हिस्सा बनीं।
साल 2018 उनके करियर में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव लेकर आया। उन्होंने सिर्फ कैमरे के सामने अभिनय ही नहीं किया, बल्कि ‘सूरमा’ के जरिए निर्माता के तौर पर भी कदम रखा। भारतीय हॉकी खिलाड़ी संदीप सिंह की जिंदगी पर बनी इस स्पोर्ट्स ड्रामा फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। इसी साल वह ‘साहेब, बीवी और गैंगस्टर 3’ में भी नजर आईं।
इसके बाद चित्रांगदा ने डिजिटल प्लेटफॉर्म का रुख किया। 2022 में वह ‘मॉडर्न लव मुंबई’ में नजर आईं। 2021 की फिल्म ‘बॉब बिस्वास’ में उन्होंने मैरी बिस्वास का किरदार निभाया। यह भूमिका भी उनके पहले के ग्लैमरस किरदारों से काफी अलग थी। 2023 में ‘गैसलाइट’ में उन्होंने रुक्मिणी का किरदार निभाया, जिसमें रहस्य और भावनाओं की कई परतें थीं।
2025 में आई ‘खाकी: द बंगाल चैप्टर’ में चित्रांगदा ने एक प्रभावशाली राजनीतिक किरदार निभाया। इस भूमिका में उनका अंदाज पहले से बिल्कुल अलग दिखाई दिया। पर्दे पर उनका आत्मविश्वास और राजनीतिक तेवर चर्चा में रहे।
--आईएएनएस
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