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10 साल की उम्र में शहीद हो गए थे पिता, अशोक चक्र विजेता की बेटी हैं रुक्मिणी; फुटेज में देंखे अब यश की ‘टॉक्सिक’ में आएंगी नजर

 

साउथ सिनेमा की चर्चित अभिनेत्री रुक्मिणी वसंत इन दिनों अभिनेता यश की फिल्म ‘टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स’ को लेकर सुर्खियों में हैं। रुक्मिणी फिल्म में एक अहम भूमिका निभा रही हैं। हालांकि, फिल्मों में पहचान बनाने वाली रुक्मिणी की निजी जिंदगी की कहानी भी बेहद प्रेरणादायक और भावुक है।रुक्मिणी जब महज 10 साल की थीं, तभी उनके पिता कर्नल वसंत वेणुगोपाल आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान शहीद हो गए थे। देश की सेवा करते हुए उनके पिता ने सर्वोच्च बलिदान दिया और उनकी वीरता के लिए उन्हें देश के सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार अशोक चक्र से सम्मानित किया गया।

उरी में आतंकियों से लड़ी थी लड़ाई

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कर्नल वसंत वेणुगोपाल भारतीय सेना के अधिकारी थे। वह 9वीं बटालियन, मराठा लाइट इन्फैंट्री में तैनात थे। जम्मू-कश्मीर के उरी इलाके में आतंकवादियों के खिलाफ एक अभियान के दौरान उन्होंने बहादुरी से मोर्चा संभाला।बताया जाता है कि इस ऑपरेशन में करीब 8 आतंकवादी शामिल थे। कर्नल वसंत ने आतंकियों का डटकर मुकाबला किया। ऑपरेशन के दौरान उन्होंने अदम्य साहस का परिचय दिया और देश की रक्षा करते हुए शहीद हो गए।उनके बलिदान और वीरता को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें अशोक चक्र से सम्मानित किया। यह सम्मान उनके परिवार के लिए गर्व के साथ-साथ उस अपूरणीय क्षति की याद भी है, जिसे रुक्मिणी और उनके परिवार ने कम उम्र में झेला।

10 साल की उम्र में सिर से उठा पिता का साया

रुक्मिणी के लिए पिता को खोना बेहद मुश्किल अनुभव रहा होगा। जब उन्होंने अपने पिता को खोया, तब वह केवल 10 वर्ष की थीं। इतनी कम उम्र में परिवार पर आई इस त्रासदी के बावजूद उनकी मां और परिवार ने हिम्मत बनाए रखी।रुक्मिणी की जिंदगी पर उनके पिता की देशभक्ति और सैनिक जीवन का गहरा प्रभाव रहा है। परिवार ने कर्नल वसंत की विरासत को आगे बढ़ाते हुए सैनिकों और उनके परिवारों की मदद से जुड़े सामाजिक कार्य भी किए।

मां और बहनों ने भी संभाला मोर्चा

कर्नल वसंत के शहीद होने के बाद उनकी पत्नी और बेटियों ने सैनिक परिवारों की मदद से जुड़े कामों को आगे बढ़ाया। परिवार की इस पहल का उद्देश्य उन परिवारों के साथ खड़ा होना था, जिन्होंने देश की सेवा में अपने प्रियजनों को खोया है।रुक्मिणी ने भी अपने जीवन में आगे बढ़ते हुए अभिनय को करियर बनाया। उन्होंने सिनेमा की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनानी शुरू की और दक्षिण भारतीय फिल्मों में काम किया।

अब यश के साथ ‘टॉक्सिक’ में आएंगी नजर

रुक्मिणी वसंत के करियर की बात करें तो उन्होंने कन्नड़ सिनेमा में अपनी पहचान बनाई है। उनके अभिनय को दर्शकों और समीक्षकों से सराहना मिली है। अब उनकी लोकप्रियता का दायरा और बड़ा होने वाला है, क्योंकि वह सुपरस्टार यश की फिल्म ‘टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स’ का हिस्सा हैं।फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच काफी उत्सुकता है। यश की स्टार पावर के साथ रुक्मिणी की मौजूदगी ने भी फिल्म को लेकर चर्चा बढ़ा दी है।रुक्मिणी की कहानी सिर्फ एक अभिनेत्री के फिल्मी सफर की कहानी नहीं है। यह उस परिवार की कहानी भी है जिसने देश की सेवा में अपने प्रियजन को खोया, उस दर्द के साथ आगे बढ़ा और समाज के दूसरे सैनिक परिवारों की मदद करने का संकल्प लिया। यही वजह है कि पर्दे पर अपनी पहचान बनाने वाली रुक्मिणी वसंत की निजी जिंदगी भी लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।