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‘डॉग वॉकर-माली बन जाऊंगा…’ क्या संन्यास लेने वाले है अक्षय कुमार, बोले - 'रोज़ सुबह 4 बजे.....' 

 

अक्षय कुमार की फ़िल्म 'वेलकम टू द जंगल' का ट्रेलर रिलीज़ हो गया है और दर्शकों से इसे बहुत अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है; अक्षय के फ़ैन्स इसे बहुत पसंद कर रहे हैं। फ़िल्म में लगभग 30 स्टार्स हैं, और सभी ने शानदार परफ़ॉर्मेंस दी है। इसी बीच, अक्षय कुमार के रिटायरमेंट की बातें भी सामने आई हैं। एक्टर ने माना कि कभी-कभी उन्हें भी रिटायर होने का मन करता है। आइए देखते हैं कि रिटायरमेंट के सवाल पर एक्टर ने क्या कहा।

'वेलकम टू द जंगल' का ट्रेलर लॉन्च इवेंट मुंबई में हुआ, जिसमें फ़िल्म की लगभग पूरी स्टार कास्ट मौजूद थी। लीड रोल निभाने वाले स्टार्स - जैसे दिशा पाटनी, जैकलीन और राजपाल यादव - भी इवेंट में शामिल हुए। इवेंट के दौरान एक्टर से पूछा गया, "आप 36 सालों से फ़िल्म इंडस्ट्री में काम कर रहे हैं; क्या आपको कभी रिटायर होने का मन करता है?"

**अक्षय कुमार रिटायरमेंट के बारे में सोचते हैं**

इस सवाल का जवाब देते हुए अक्षय कुमार ने कहा, "ऐसा होता है - जब मैं सुबह 4 बजे उठता हूँ, तो मेरे मन में यह बात आती है, लेकिन पाँच सेकंड बाद ही मुझे याद आता है कि मुझे शूट पर जाना है। फिर मुझे एहसास होता है कि 300 लोग मेरा इंतज़ार कर रहे हैं। इसलिए, मैं शूट पर चला जाता हूँ। अगले दिन, मैं फिर से रिटायरमेंट के बारे में सोचता हूँ; यह सिलसिला ऐसे ही चलता रहता है, और 36 साल इसी तरह गुज़र गए।"

**'मैं डॉग वॉकर और माली बन जाऊँगा...'**

अक्षय कुमार ने रिटायरमेंट पर आगे कहा, "रिटायरमेंट के बारे में मैं यह पूछना चाहूँगा: अगर मैं सच में रिटायर हो जाऊँ तो क्या होगा? घर पर बैठकर मुझे क्या मिलेगा? ज़्यादा से ज़्यादा, मैं कुछ बिजली का काम कर सकता हूँ। मैं डॉग वॉकर या माली बन जाऊँगा। मैं घर के सारे काम करूँगा। मुझे लगता है कि रिटायर होने से बेहतर काम पर जाना है; यह एक बेहतर ऑप्शन लगता है।" अक्षय कुमार कहते हैं - कभी रिटायर न हों...

परिवार के साथ समय बिताने के बारे में बात करते हुए अक्षय ने कहा, "मेरा भी परिवार के साथ समय बिताने का मन करता है। मैंने ऐसा करने की कोशिश भी की, लेकिन एक दिन बाद ही उन्होंने पूछा, 'डैड, आप काम पर कब जा रहे हैं?'" तो, बस काम पर जाइए - बस इतना ही। सच कहूँ तो, मुझे रिटायरमेंट का कॉन्सेप्ट ही गलत लगता है। इंसान को रिटायरमेंट तभी लेना चाहिए जब उसकी ज़िंदगी के बस पाँच सेकंड ही बचे हों। रिटायर नहीं होना चाहिए; इंसान को ज़िंदगी भर काम करते रहना चाहिए।