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फिल्म कलाकारों पर बैन के खिलाफ कोर्ट पहुंचे टीपी अग्रवाल, वीडियो में जाने फिल्म संगठनों के अधिकारों पर उठाए सवाल

 

टीपी अग्रवाल ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि कुछ फिल्म संगठन कलाकारों और तकनीशियनों के खिलाफ बैन या नॉन-कोऑपरेशन जैसे निर्देश जारी करते हैं, जबकि उनके पास ऐसा करने का कानूनी अधिकार नहीं है। उन्होंने Federation of Western India Cine Employees और Indian Motion Picture Producers Association के खिलाफ दिंडोशी सिविल कोर्ट में याचिका दायर की है।

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'काम करने के अधिकार पर रोक नहीं लगाई जा सकती'

याचिका में कहा गया है कि किसी भी कलाकार, निर्माता, तकनीशियन या अन्य फिल्मकर्मी को काम करने से रोकना या उसके खिलाफ नॉन-कोऑपरेशन का निर्देश जारी करना कानून के दायरे में नहीं आता। अग्रवाल का तर्क है कि इस प्रकार के फैसले व्यक्तियों के पेशेवर अधिकारों को प्रभावित करते हैं।उन्होंने अदालत से इस मुद्दे पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है ताकि भविष्य में किसी भी कलाकार या फिल्मकर्मी को मनमाने प्रतिबंधों का सामना न करना पड़े।

कोर्ट ने जारी किया नोटिस

मामले पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद दिंडोशी सिविल कोर्ट ने दोनों संगठनों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अब अदालत में दोनों पक्ष अपने-अपने तर्क पेश करेंगे।

फिल्म इंडस्ट्री में अहम बहस

यह मामला फिल्म उद्योग में लंबे समय से चल रही उस बहस को फिर से सामने लेकर आया है, जिसमें यह सवाल उठता रहा है कि क्या किसी एसोसिएशन या संगठन को अपने सदस्यों अथवा अन्य कलाकारों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई करने का अधिकार है।कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत का फैसला भविष्य में फिल्म उद्योग की कार्यप्रणाली और विभिन्न संगठनों की शक्तियों को लेकर महत्वपूर्ण मिसाल साबित हो सकता है।फिलहाल सभी की नजर कोर्ट की आगामी सुनवाई और दोनों संगठनों की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है।