प्रकाश राज ने किया सत्ता परिवर्तन की मांग का समर्थन, वीडियो में बोले- 2029 तक जारी रहेगी लोकतांत्रिक लड़ाई
अभिनेता प्रकाश राज एक बार फिर अपने राजनीतिक बयान को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने केंद्र सरकार में बदलाव की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि भारत में सत्ता परिवर्तन चुनाव और संवैधानिक तरीकों से होना चाहिए। उनके मुताबिक, देश के पास संविधान, मतदान का अधिकार और शांतिपूर्ण विरोध की ताकत है। उन्होंने 2029 के लोकसभा चुनाव तक लोकतांत्रिक तरीके से अपनी लड़ाई जारी रखने की बात भी कही। ‘इंडिया टुडे’ से बातचीत में प्रकाश राज ने बांग्लादेश और नेपाल का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत की परिस्थितियां इन देशों से अलग हैं। उन्होंने डॉ. भीमराव आंबेडकर, महात्मा गांधी और भगत सिंह की विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था और संविधान के जरिए बदलाव लाने के रास्ते मौजूद हैं।
चुनाव और संविधान के जरिए हो सत्ता परिवर्तन
प्रकाश राज ने कहा कि सरकार बदलने की मांग को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने संविधान और मतदान के अधिकार को देश की सबसे महत्वपूर्ण ताकतों में शामिल बताया।अभिनेता के मुताबिक, भारत में नागरिकों के पास चुनाव के माध्यम से सरकार बदलने का अधिकार है। इसके अलावा शांतिपूर्ण विरोध और अपनी बात रखने के लोकतांत्रिक तरीके भी मौजूद हैं। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार के खिलाफ असहमति जताने के लिए संवैधानिक व्यवस्था के भीतर रहकर संघर्ष जारी रखना चाहिए।
बांग्लादेश और नेपाल का दिया उदाहरण
बातचीत के दौरान प्रकाश राज ने बांग्लादेश और नेपाल का जिक्र करते हुए कहा कि भारत की लोकतांत्रिक और संवैधानिक परिस्थितियां अलग हैं। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन और संविधान निर्माण से जुड़े प्रमुख व्यक्तित्वों का उल्लेख किया।उन्होंने डॉ. भीमराव आंबेडकर, महात्मा गांधी और भगत सिंह की विरासत का हवाला देते हुए कहा कि भारत में लोकतांत्रिक अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों के आधार पर बदलाव की राह अपनाई जानी चाहिए।
2029 के लोकसभा चुनाव तक लड़ाई जारी रखने की बात
प्रकाश राज ने कहा कि लोकतांत्रिक लड़ाई 2029 के लोकसभा चुनाव तक जारी रहनी चाहिए। उनके बयान से स्पष्ट है कि वह सत्ता परिवर्तन के लिए चुनावी प्रक्रिया और संवैधानिक तरीकों को प्राथमिकता देने की बात कर रहे हैं।उनके मुताबिक, लोकतंत्र में सरकार की नीतियों पर सवाल उठाना और बदलाव की मांग करना नागरिकों का अधिकार है। हालांकि, सत्ता परिवर्तन का अंतिम फैसला चुनाव और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए ही होना चाहिए।
तिरंगा मार्च से पहले हिरासत में लिए जाने पर उठाए सवाल
अभिनेता ने तिरंगा मार्च से पहले प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने और उनकी आवाज दबाने के आरोपों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि शांतिपूर्ण विरोध करने वालों के साथ किस तरह व्यवहार किया जा रहा है।प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने और उनकी आवाज दबाने से जुड़े आरोपों पर संबंधित पक्षों का विस्तृत जवाब सामने आने पर मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।प्रकाश राज के बयान ने सरकार में बदलाव की मांग, विरोध प्रदर्शन के अधिकार और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को लेकर चल रही बहस को फिर चर्चा में ला दिया है। उन्होंने अपने रुख में संविधान, मतदान और शांतिपूर्ण विरोध को प्रमुखता दी है।