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नेताजी के पोते ने फिल्म ‘फौजी’ पर उठाए सवाल, वीडियो में बोले- ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं; निर्देशक से मांगी माफी

 

नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पोते चंद्र कुमार बोस ने आगामी फिल्म ‘फौजी’ की आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि फिल्म में नेताजी सुभाष चंद्र बोस और जर्मनी के तानाशाह एडॉल्फ हिटलर की ऐतिहासिक मुलाकात को गलत और सनसनीखेज तरीके से दिखाया गया है। चंद्र कुमार बोस ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास और राष्ट्रीय प्रतीकों से जुड़े तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत करना गंभीर मामला है। उन्होंने फिल्म के निर्देशक से नेताजी और स्वतंत्रता संग्राम का सम्मान करने वाले देशवासियों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है।न्यूज एजेंसी से बातचीत में चंद्र कुमार बोस ने कहा कि फिल्मों में ऐतिहासिक घटनाओं को दिखाते समय उनके वास्तविक संदर्भ और महत्व का ध्यान रखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, नेताजी की हिटलर से मुलाकात का उद्देश्य भारत की आजादी के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाना था, न कि किसी विदेशी नेता के सामने अधीनस्थ की भूमिका निभाना।

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भारत की आजादी के लिए समर्थन जुटाना चाहते थे नेताजी

चंद्र कुमार बोस ने नेताजी और हिटलर की मुलाकात का ऐतिहासिक संदर्भ बताते हुए कहा कि नेताजी भारत को ब्रिटिश शासन से मुक्त कराने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग हासिल करने की कोशिश कर रहे थे। उस समय उनका मानना था कि जर्मनी और जापान जैसी शक्तियां भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में मददगार साबित हो सकती हैं।उन्होंने जर्मनी के हिटलर और जापान के तत्कालीन नेता हिदेकी तोजो का जिक्र करते हुए कहा कि नेताजी ने भारत की आजादी के उद्देश्य से इन देशों से समर्थन हासिल करने की रणनीति अपनाई थी।चंद्र कुमार बोस ने जोर देकर कहा कि नेताजी ने हिटलर से बातचीत किसी अधीनस्थ की तरह नहीं, बल्कि अपने देश की स्वतंत्रता के लिए प्रयास कर रहे नेता के रूप में की थी। उनका आरोप है कि फिल्म में इस मुलाकात को गलत तरीके से पेश करने से नेताजी की ऐतिहासिक भूमिका और गरिमा प्रभावित हो सकती है।

फिल्म के चित्रण पर जताई नाराजगी

चंद्र कुमार बोस के मुताबिक, फिल्म में नेताजी और हिटलर के बीच हुई मुलाकात को सनसनीखेज अंदाज में दिखाया गया है। उन्हों कहा कि किसी भी ऐतिहासिक व्यक्तित्व को पर्दे पर प्रस्तुत करते समय उस दौर की परिस्थितियों, राजनीतिक घटनाक्रम और संबंधित नेताओं के उद्देश्यों को समझना जरूरी है।उन्होंने फिल्म के निर्देशक से अपील की कि स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी घटनाओं को फिल्माने से पहले ऐतिहासिक तथ्यों का सही तरीके से अध्ययन किया जाना चाहिए था। उनके अनुसार, रचनात्मक स्वतंत्रता के नाम पर इतिहास को गलत ढंग से प्रस्तुत करना उचित नहीं है।

निर्देशक से सार्वजनिक माफी की मांग

चंद्र कुमार बोस ने फिल्म के निर्देशक से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है। उन्होंने कहा कि नेताजी का सम्मान करने वाले और स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को महत्व देने वाले लोगों की भावनाओं का ध्यान रखा जाना चाहिए।फिलहाल, चंद्र कुमार बोस की आपत्ति फिल्म में ऐतिहासिक घटनाओं के चित्रण को लेकर है। फिल्म के निर्देशक या निर्माताओं की ओर से इस आलोचना पर क्या प्रतिक्रिया आती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। फिल्म में विवादित दृश्य किस संदर्भ में दिखाए गए हैं और उनका वास्तविक ऐतिहासिक घटनाओं से कितना संबंध है, इस पर अंतिम निष्कर्ष के लिए फिल्म के संबंधित दृश्य और निर्माताओं का पक्ष सामने आना जरूरी है।नेताजी सुभाष चंद्र बोस का स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान भारतीय इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय है। ऐसे में उन पर आधारित फिल्मों में ऐतिहासिक तथ्यों और रचनात्मक प्रस्तुति के बीच संतुलन को लेकर यह विवाद चर्चा में आ गया है।