आयुष्मान खुराना का सफर: रेडियो जॉकी से बॉलीवुड स्टार तक, वीडियो में जाने रिजेक्शन के बाद बनाई अलग पहचान
आयुष्मान खुराना आज बॉलीवुड के उन अभिनेताओं में गिने जाते हैं, जिन्होंने अपनी अलग तरह की फिल्मों और किरदारों के जरिए इंडस्ट्री में पहचान बनाई है। उनकी फिल्मों में अक्सर ऐसे विषय देखने को मिले, जिन्हें मुख्यधारा का सिनेमा लंबे समय तक नजरअंदाज करता रहा। हालांकि, इस मुकाम तक पहुंचने का उनका सफर आसान नहीं था। चंडीगढ़ से निकलकर मुंबई तक पहुंचने से पहले आयुष्मान ने कई अलग-अलग क्षेत्रों में काम किया और लगातार संघर्ष किया।
थिएटर से शुरू हुआ सफर
आयुष्मान का झुकाव बचपन से ही परफॉर्मिंग आर्ट्स की ओर था। उन्होंने थिएटर किया और मंच पर अभिनय का अनुभव हासिल किया। इसके बाद उन्होंने रेडियो जॉकी के तौर पर भी काम किया। रेडियो पर उनकी आवाज और बातचीत के अंदाज ने उन्हें पहचान दिलाई।इसके बाद आयुष्मान एमटीवी से जुड़े और वीजे के तौर पर काम किया। यहां उन्हें युवाओं के बीच लोकप्रियता मिली। हालांकि, उनका सपना फिल्मों में अभिनेता बनने का था। इसके लिए उन्होंने कई ऑडिशन दिए, लेकिन हर जगह सफलता नहीं मिली।
इंडियन आइडल में भी मिला था रिजेक्शन
बॉलीवुड में कदम रखने से पहले आयुष्मान खुराना ने टीवी के लोकप्रिय सिंगिंग रियलिटी शो ‘इंडियन आइडल’ के दूसरे सीजन में भी हिस्सा लिया था। उन्हें यहां भी रिजेक्शन का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ा और मनोरंजन की दुनिया में लगातार आगे बढ़ते रहे।उनके करियर की यह शुरुआती असफलताएं बाद में उनके लिए सीख साबित हुईं। रेडियो, टेलीविजन और थिएटर के अनुभव ने उन्हें कैमरे के सामने सहज होने में मदद की।
‘विक्की डोनर’ से बॉलीवुड में एंट्री
साल 2012 में आयुष्मान खुराना ने फिल्म ‘विक्की डोनर’ से बॉलीवुड में कदम रखा। फिल्म का विषय उस दौर के लिए काफी अलग था और आयुष्मान ने भी अपने किरदार को सहज अंदाज में निभाया।‘विक्की डोनर’ बॉक्स ऑफिस पर सफल रही और आयुष्मान की पहली ही फिल्म ने उन्हें एक अलग तरह के अभिनेता के रूप में पहचान दिला दी। दर्शकों और फिल्म इंडस्ट्री का ध्यान उनकी ओर गया।
लगातार तीन फिल्मों के बाद फिर बदली कहानी
पहली फिल्म की सफलता के बाद आयुष्मान के करियर का सफर पूरी तरह आसान नहीं रहा। उनकी लगातार तीन फिल्में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकीं। ऐसे समय में किसी भी अभिनेता के लिए करियर को संभालना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।आयुष्मान ने हालांकि अलग-अलग तरह के किरदारों को चुनना जारी रखा। साल 2015 में आई ‘दम लगा के हईशा’ ने उनके करियर को दोबारा रफ्तार दी। फिल्म की कहानी, किरदार और आयुष्मान की एक्टिंग को दर्शकों ने पसंद किया।
अलग विषयों वाली फिल्मों से बनाई पहचान
‘दम लगा के हईशा’ के बाद आयुष्मान ने अपने लिए एक अलग रास्ता बनाया। उन्होंने ऐसे विषयों पर आधारित फिल्मों में काम किया, जो सामाजिक मुद्दों और आम जिंदगी की कहानियों से जुड़े थे।‘बरेली की बर्फी’, ‘शुभ मंगल सावधान’, ‘अंधाधुन’, ‘बधाई हो’, ‘आर्टिकल 15’, ‘ड्रीम गर्ल’ और ‘बाला’ जैसी फिल्मों ने उनके करियर को मजबूत किया। इन फिल्मों में उन्होंने रोमांस, कॉमेडी, सामाजिक मुद्दों और थ्रिलर जैसे अलग-अलग जॉनर में काम ।आयुष्मान की खासियत यह रही कि उन्होंने अपने करियर में एक ही तरह के किरदारों को दोहराने के बजाय लगातार नए विषयों और भूमिकाओं के साथ प्रयोग किया। रेडियो जॉकी से अभिनेता बनने तक का उनका सफर इस बात का उदाहरण है कि शुरुआती रिजेक्शन के बावजूद लगातार प्रयास जारी रखे जाएं तो मनोरंजन की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई जा सकती है।