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अर्द्धकुंभ से पहले हरिद्वार में मीट की दुकानें हटाने पर बोले आचार्य अयोध्या प्रसाद, मन की शुद्धि के लिए जरूरी कदम

 

प्रयागराज, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। अर्द्धकुंभ 2027 को लेकर तैयारियां जोरों पर है। ऐसे में पहले धार्मिक माहौल को शुद्ध और संतुलित बनाए रखने को लेकर कई तरह के कदम उठाए जा रहे हैं। इसी बीच प्रयागराज से जुड़े आचार्य अयोध्या प्रसाद शास्त्री का एक बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने हरिद्वार में मीट की दुकानों को हटाने के फैसले की खुलकर सराहना की है। उनका मानना है कि यह कदम अर्द्धकुंभ जैसे बड़े धार्मिक आयोजन के दौरान जरूरी है, क्योंकि इससे साधु-संतों और श्रद्धालुओं के लिए अनुकूल और पवित्र वातावरण तैयार होता है।

आचार्य अयोध्या प्रसाद शास्त्री ने जारी बयान में कहा, ''अर्द्धकुंभ के दौरान बड़ी संख्या में साधु-संत, तपस्वी और श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचते हैं। इस दौरान वे यज्ञ, तप, अनुष्ठान और व्रत जैसे धार्मिक कार्यों में लगे रहते हैं। ऐसे समय में अगर उनके आसपास ऐसी चीजें दिखाई देती हैं, जो उनकी आस्था या साधना के विपरीत हों, तो उनके मन में घृणा का भाव उत्पन्न हो सकता है।''

उन्होंने कहा कि धार्मिक साधना के लिए मन की शुद्धि बहुत जरूरी होती है, और इस तरह के कदम उसी दिशा में उठाए गए प्रयास हैं।

अर्द्धकुंभ एक विशाल और महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन है, जो हर छह साल में आयोजित होता है। यह मुख्य रूप से प्रयागराज और हरिद्वार में आयोजित किया जाता है। इस दौरान लाखों-करोड़ों श्रद्धालु गंगा स्नान करने के लिए पहुंचते हैं। मान्यता है कि इस दौरान गंगा में स्नान करने से व्यक्ति के पाप धुल जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग मिलता है।

अर्धकुंभ आध्यात्मिक ऊर्जा और सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक है। यहां देशभर से साधु-संत, अखाड़े और विभिन्न धार्मिक संगठन एकत्रित होते हैं। यज्ञ, हवन, प्रवचन, भजन-कीर्तन और ध्यान जैसे कई धार्मिक कार्यक्रम इस दौरान आयोजित किए जाते हैं, जिससे पूरा वातावरण भक्ति और आस्था से भर जाता है।

कुंभ मेले की परंपरा सदियों पुरानी है और इसका संबंध पौराणिक कथा 'समुद्र मंथन' से जोड़ा जाता है। मान्यता के अनुसार, अमृत की बूंदें जिन स्थानों पर गिरी थीं, वहीं आज कुंभ और अर्द्धकुंभ का आयोजन होता है। यही कारण है कि इन स्थानों को अत्यंत पवित्र माना जाता है और यहां स्नान करने का विशेष महत्व होता है।

--आईएएनएस

पीके/पीएम