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UPSC Preparation: IAS बनने के लिए रोज 15 घंटे पढ़ना जरूरी नहीं, 6 घंटे की स्मार्ट स्टडी से भी मिलेगी सफलता
 

 

UPSC Civil Services Examination को देश की सबसे चुनौतीपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं में माना जाता है। यही वजह है कि कई अभ्यर्थियों को लगता है कि IAS बनने के लिए रोजाना 12 से 15 घंटे तक पढ़ाई करना जरूरी है। लेकिन UPSC की तैयारी में केवल पढ़ाई के घंटों की संख्या ही सफलता तय नहीं करती। सही रणनीति, निरंतरता, रिवीजन और टेस्ट प्रैक्टिस भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।

कई सफल अभ्यर्थियों की तैयारी से यह समझ आता है कि अगर पढ़ाई पूरी एकाग्रता के साथ की जाए तो रोजाना 5 से 6 घंटे की प्रभावी स्टडी भी मजबूत तैयारी की नींव रख सकती है।

6 घंटे की पढ़ाई कैसे बन सकती है पर्याप्त?
UPSC की तैयारी में यह ज्यादा मायने रखता है कि आपने कितने घंटे किताब के सामने बिताए, इसके बजाय यह देखें कि उन घंटों में कितना सीखा और याद रखा।
अगर रोजाना 6 घंटे पढ़ाई करनी है तो इसे अलग-अलग हिस्सों में बांटा जा सकता है। उदाहरण के लिए दो से तीन घंटे किसी मुख्य विषय को देने के बाद एक से दो घंटे करंट अफेयर्स और बाकी समय रिवीजन या आंसर राइटिंग में लगाया जा सकता है।
नौकरी या अन्य जिम्मेदारियों के साथ तैयारी करने वाले उम्मीदवारों के लिए भी ऐसा शेड्यूल व्यावहारिक हो सकता है।
किताबों का ढेर लगाने से नहीं बनेगी तैयारी
UPSC की तैयारी में बहुत ज्यादा स्टडी मटीरियल जुटाने के बजाय कुछ भरोसेमंद स्रोतों पर टिके रहना ज्यादा उपयोगी माना जाता है।
शुरुआत में NCERT की किताबों से बेसिक कॉन्सेप्ट मजबूत किए जा सकते हैं। इतिहास, भूगोल, राजनीति और अर्थव्यवस्था जैसे विषयों की बुनियादी समझ बनने के बाद सीमित स्टैंडर्ड बुक्स से तैयारी आगे बढ़ाई जा सकती है।
इसके साथ करंट अफेयर्स को सिलेबस के स्थायी हिस्सों से जोड़कर पढ़ना जरूरी है। इससे केवल खबरें याद करने के बजाय उनके पीछे की पूरी अवधारणा समझने में मदद मिलती है।

Daily Routine में क्या रखें?
UPSC की तैयारी के दौरान रोजाना का रूटीन बहुत ज्यादा जटिल रखने की जरूरत नहीं है। इसमें कुछ जरूरी गतिविधियां नियमित रूप से शामिल होनी चाहिए।
•    रोजाना महत्वपूर्ण करंट अफेयर्स पढ़ें और छोटे नोट्स बनाएं।
•    एक या दो प्रमुख विषयों को निर्धारित समय दें।
•    पहले पढ़े हुए टॉपिक्स का रिवीजन करें।
•    रोजाना कम से कम एक-दो उत्तर लिखने का अभ्यास करें।
•    सप्ताह में एक बार अपनी तैयारी का टेस्ट लें।
•    टेस्ट में हुई गलतियों को पहचानकर उन्हें दोबारा पढ़ें।
Weekly और Monthly Target भी बनाएं
केवल रोजाना कितने घंटे पढ़ना है, इसका लक्ष्य बनाना पर्याप्त नहीं है। तैयारी को साप्ताहिक और मासिक टारगेट में बांटना ज्यादा प्रभावी हो सकता है।
उदाहरण के तौर पर एक सप्ताह में किसी विषय का एक निश्चित हिस्सा पूरा करने और उसके बाद सेक्शनल टेस्ट देने का लक्ष्य रखा जा सकता है। महीने के अंत में उस अवधि में पढ़े गए टॉपिक्स का रिवीजन और फुल लेंथ टेस्ट करने से तैयारी की वास्तविक स्थिति का पता चलता है।
Revision को बिल्कुल न करें नजरअंदाज

UPSC का सिलेबस काफी बड़ा है और एक बार पढ़ने से ज्यादातर चीजें लंबे समय तक याद रखना मुश्किल होता है। इसलिए पढ़ाई के साथ रिवीजन का समय तय करना जरूरी है।
नई-नई किताबें पढ़ते रहने के बजाय पहले से तैयार किए गए नोट्स और महत्वपूर्ण स्टडी मटीरियल को बार-बार दोहराना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है।
Exam से पहले बढ़ाएं तैयारी की रफ्तार
तैयारी के शुरुआती चरण में रोजाना 5-6 घंटे की प्रभावी पढ़ाई पर्याप्त हो सकती है, लेकिन परीक्षा नजदीक आने पर रणनीति में बदलाव करना पड़ता है।

परीक्षा से करीब 3-4 महीने पहले रिवीजन, मॉक टेस्ट और पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। इस समय नई किताबें शुरू करने के बजाय पहले पढ़े गए सिलेबस को मजबूत करना बेहतर रहता है।
UPSC में घंटे नहीं, निरंतरता दिलाती है सफलता
UPSC की तैयारी को किसी तय संख्या के घंटों से नहीं जोड़ा जा सकता। किसी के लिए 6 घंटे पर्याप्त हो सकते हैं तो किसी को अपनी परिस्थितियों और तैयारी के स्तर के अनुसार इससे ज्यादा समय देना पड़ सकता है।
सबसे जरूरी बात यह है कि पढ़ाई फोकस्ड, नियमित और सही दिशा में हो। अगर सीमित समय में सिलेबस, रिवीजन, करंट अफेयर्स, आंसर राइटिंग और टेस्ट प्रैक्टिस को संतुलित किया जाए, तो तैयारी को मजबूत बनाया जा सकता है।