UP Teacher Recruitment: 69 हजार भर्ती में चयन का पूरा डेटा मांगा, 6 अक्टूबर को फिर होगी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
उत्तर प्रदेश की 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती में 19 हजार सीटों के आरक्षण से जुड़े विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार से भर्ती की मूल चयन सूची और उम्मीदवारों से जुड़ा विस्तृत डेटा उपलब्ध कराने को कहा है। अदालत यह देखना चाहती है कि उम्मीदवारों का चयन उनके अंक, कैटेगरी और मेरिट के आधार पर किस तरह किया गया था।
जस्टिस एसवीएन भट्टी और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने सरकार को ऐसी सूची तैयार करने का निर्देश दिया है, जिसमें चयनित उम्मीदवारों से संबंधित जरूरी जानकारी शामिल हो। मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर 2026 को होनी है।
चयनित उम्मीदवारों की पूरी जानकारी मांगी
सुप्रीम कोर्ट ने 69 हजार भर्ती की मूल चयन सूची का डेटा पेश करने को कहा है। इसमें उम्मीदवार का नाम, क्रमांक, कैटेगरी, लिखित परीक्षा में मिले अंक, ATRE के अंक और क्वालिटी पॉइंट जैसी जानकारी शामिल करने को कहा गया है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल 64 या 65 प्रतिशत अंक वाले उम्मीदवारों का डेटा पर्याप्त नहीं होगा। संबंधित अंक सीमा में आने वाले सभी उम्मीदवारों की जानकारी उपलब्ध करानी होगी, ताकि मेरिट और चयन प्रक्रिया को पूरी तरह समझा जा सके।
गलत सवाल के एक अंक का भी मामला
सुनवाई के दौरान आंसर-की में गलत सवाल के कारण दिए गए एक अंक का मुद्दा भी उठा। अदालत ने यह जानकारी मांगी कि गलत प्रश्न के लिए अंक किन उम्मीदवारों को दिए गए और इस अतिरिक्त अंक का चयन सूची पर क्या प्रभाव पड़ा।
मामले में यह भी बताया गया कि उस समय अदालत का रुख अपनाने वाले कुछ उम्मीदवारों को इस एक अंक का लाभ मिला था, क्योंकि इसके कारण वे चयन से बाहर रह गए थे।
EWS उम्मीदवारों को लेकर क्या कहा गया?
सुनवाई में EWS कैटेगरी के उम्मीदवारों का मुद्दा भी सामने आया। उनकी ओर से कहा गया कि अगर भर्ती की चयन सूची दोबारा तैयार होती है तो EWS उम्मीदवारों को भी इसमें शामिल किया जाना चाहिए।
पीठ ने कहा कि यदि लखनऊ हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रहता है और चयन सूची को दोबारा तैयार करने की स्थिति बनती है, तो EWS उम्मीदवारों को शामिल करने के सवाल पर विचार किया जाएगा। इस मुद्दे पर आगे सुनवाई होनी है।
पहले से नियुक्त शिक्षकों को लेकर भी दलील
पहले से चयनित और नियुक्त शिक्षकों की ओर से अदालत में यह दलील दी गई कि अगर 69 हजार भर्ती की सूची दोबारा तैयार की जाती है, तो मौजूदा शिक्षकों को सीधे भर्ती प्रक्रिया से बाहर नहीं किया जाना चाहिए।
इस दौरान 18 नवंबर 2020 के रामशरण मौर्य मामले का हवाला दिया गया और बीएड अभ्यर्थियों की पात्रता से जुड़े NCTE नियमों का भी उल्लेख हुआ।
B.Ed और BTC अभ्यर्थियों की संख्या पर सवाल
सुनवाई के दौरान 69 हजार चयनित उम्मीदवारों में B.Ed अभ्यर्थियों की संख्या को लेकर भी चर्चा हुई। चयनित उम्मीदवारों की ओर से करीब 40 हजार B.Ed अभ्यर्थियों का आंकड़ा बताया गया, जबकि आरक्षित वर्ग की ओर से यह संख्या करीब 36 हजार बताई गई।
राज्य सरकार की ओर से पेश वकील अंकित गोयल ने कहा कि सटीक आंकड़ा तत्काल उपलब्ध कराना संभव नहीं है और इसके लिए डेटा तैयार करने में समय लगेगा। सरकार ने यह भी कहा कि मौजूदा मामले में B.Ed और BTC का विवाद मुख्य मुद्दा नहीं है।
अब डेटा के आधार पर आगे बढ़ेगा मामला
सुप्रीम कोर्ट द्वारा मांगे गए विस्तृत डेटा का उद्देश्य भर्ती में मेरिट, कैटेगरी और आरक्षण के आधार पर चयन की स्थिति को स्पष्ट करना है। अदालत अब मूल चयन सूची और उम्मीदवारों के अंकों से जुड़े आंकड़ों के आधार पर मामले के विभिन्न पहलुओं पर विचार करेगी। 6 अक्टूबर की सुनवाई में इस डेटा के आधार पर आगे की प्रक्रिया पर चर्चा होने की उम्मीद है।