विदेश जाने का ट्रेंड बदला! अब ज्यादा छात्र भारत में करना चाहते हैं Graduation, सर्वे में सामने आया बड़ा बदलाव
विदेश जाकर पढ़ाई करने का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों की संख्या लंबे समय से चर्चा में रही है। लेकिन अब छात्रों की पसंद में धीरे-धीरे बदलाव देखने को मिल रहा है। एक हालिया सर्वे के मुताबिक, विदेश में अंडरग्रेजुएट पढ़ाई करने के बजाय बड़ी संख्या में छात्र भारत में रहकर ही ग्रेजुएशन करना पसंद कर रहे हैं।
Cambridge Destination Survey 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में यूनिवर्सिटी जाने की तैयारी कर रहे भारतीय Cambridge छात्रों में करीब आधे ने भारत में रहकर अपनी अंडरग्रेजुएट पढ़ाई पूरी करने का विकल्प चुना।
भारत में पढ़ाई चुनने वाले छात्रों की संख्या बढ़ी
सर्वे के मुताबिक, 2024 में भारत में अंडरग्रेजुएट पढ़ाई करने का विकल्प चुनने वाले छात्रों की हिस्सेदारी 47 फीसदी थी। 2025 में यह बढ़कर करीब 50 फीसदी हो गई।
इसका मतलब है कि अब पहले की तुलना में ज्यादा छात्र देश के भीतर ही अपनी उच्च शिक्षा शुरू करने में रुचि दिखा रहे हैं।
विदेश जाने वालों की हिस्सेदारी में आई कमी
वहीं, विदेश में अंडरग्रेजुएट पढ़ाई के लिए जाने वाले छात्रों की हिस्सेदारी में मामूली गिरावट दर्ज की गई है। 2024 में ऐसे छात्रों की हिस्सेदारी 42 फीसदी थी, जो 2025 में घटकर 40 फीसदी रह गई।
हालांकि विदेश जाकर पढ़ाई करने की इच्छा अभी भी बड़ी संख्या में छात्रों में मौजूद है, लेकिन आंकड़े संकेत देते हैं कि भारत में उपलब्ध उच्च शिक्षा के विकल्प अब छात्रों के लिए पहले से ज्यादा आकर्षक बन रहे हैं।
क्यों बदल रही है छात्रों की पसंद?
भारत में ही ग्रेजुएशन करने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। देश में नए विश्वविद्यालय, बेहतर शैक्षणिक संस्थान, आधुनिक कोर्स और रोजगार से जुड़े कार्यक्रमों के विकल्प लगातार बढ़ रहे हैं।
इसके अलावा विदेश में पढ़ाई का बढ़ता खर्च, रहने की लागत, वीजा से जुड़ी चुनौतियां और बदलते अंतरराष्ट्रीय हालात भी छात्रों और उनके परिवारों के फैसले को प्रभावित कर सकते हैं।
विदेश में पढ़ाई का सपना फिर भी कायम
सर्वे के आंकड़े यह नहीं बताते कि भारतीय छात्रों का विदेश में पढ़ाई करने का रुझान खत्म हो रहा है। अभी भी करीब 40 फीसदी छात्र अंडरग्रेजुएट शिक्षा के लिए विदेश जाने का विकल्प चुन रहे हैं।
लेकिन भारत में पढ़ाई चुनने वाले छात्रों की हिस्सेदारी का बढ़ना एक महत्वपूर्ण बदलाव है। यह संकेत देता है कि भारतीय छात्र अब विदेश को ही उच्च शिक्षा का एकमात्र बेहतर विकल्प नहीं मान रहे हैं।
उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बदलता नजरिया
अगर यह ट्रेंड आगे भी जारी रहता है तो आने वाले वर्षों में भारत के उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए यह एक सकारात्मक संकेत हो सकता है। देश में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या बढ़ने से घरेलू विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अंतरराष्ट्रीय स्तर के कोर्स और बेहतर कैंपस सुविधाओं की मांग भी बढ़ सकती है।
कुल मिलाकर, Cambridge Destination Survey 2025-26 के आंकड़े बताते हैं कि भारतीय छात्रों के बीच 'विदेश जाकर ही बेहतर पढ़ाई संभव है' वाली सोच में बदलाव आ रहा है और अब बड़ी संख्या में छात्र भारत में रहकर ही अपनी अंडरग्रेजुएट शिक्षा पूरी करने का विकल्प चुन रहे हैं।