हेल्थकेयर डिग्रियों के नियम बदले: UGC ने MPT और MOT में स्पेशलाइजेशन को दी मंजूरी, नोटिफिकेशन जारी
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी UGC ने एलाइड और हेल्थकेयर से जुड़े कई डिग्री प्रोग्राम के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। ये नए नियम शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होंगे। नए बदलाव के तहत अब मास्टर ऑफ फिजियोथेरेपी यानी MPT और मास्टर ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरेपी यानी MOT की डिग्री सिर्फ सामान्य नाम से नहीं दी जाएगी, बल्कि उसमें छात्र की स्पेशलाइजेशन का भी उल्लेख किया जाएगा।
UGC ने यह बदलाव 27 अगस्त 2026 को भारत के राजपत्र में जारी पांचवें संशोधन के तहत किया है। इसके साथ ही एलाइड और हेल्थकेयर एजुकेशन से जुड़े कई नए और संशोधित UG-PG डिग्री प्रोग्राम को भी मान्य डिग्री की सूची में शामिल किया गया है।
MPT में 8 स्पेशलाइजेशन का विकल्प
नए नियमों के तहत 2026-27 से MPT करने वाले छात्रों की डिग्री में उनकी विशेषज्ञता का नाम भी दर्ज किया जाएगा। UGC ने इसके लिए 8 प्रमुख स्पेशलाइजेशन तय किए हैं।
इनमें मस्कुलोस्केलेटल साइंसेज, न्यूरोसाइंसेज, कार्डियोवैस्कुलर एंड पल्मोनरी साइंसेज, स्पोर्ट्स साइंसेज, पीडियाट्रिक्स एंड नियोनेटल साइंसेज, ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी साइंसेज, ऑन्कोलॉजी साइंसेज और कम्युनिटी रिहैबिलिटेशन साइंसेज शामिल हैं।
MPT प्रोग्राम की न्यूनतम अवधि 2 साल होगी और इसमें एडमिशन के लिए संबंधित बैचलर डिग्री जरूरी होगी।
MOT की डिग्री में भी होगा स्पेशलाइजेशन
मास्टर ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरेपी यानी MOT के लिए भी इसी तरह का बदलाव किया गया है। अब छात्रों को चुनी गई विशेषज्ञता के आधार पर डिग्री प्रदान की जाएगी।
MOT के लिए मस्कुलोस्केलेटल साइंसेज, पीडियाट्रिक्स एंड नियोनेटल साइंसेज, न्यूरोसाइंसेज, मेंटल हेल्थ, कार्डियोवैस्कुलर एंड पल्मोनरी साइंसेज, रिहैबिलिटेशन, जेरियाट्रिक्स, हैंड और ऑन्कोलॉजिकल साइंसेज जैसे क्षेत्र निर्धारित किए गए हैं।
इस प्रोग्राम की न्यूनतम अवधि भी 2 साल रखी गई है और एडमिशन के लिए बैचलर डिग्री जरूरी होगी।
पुराने छात्रों पर नहीं लागू होंगे नए नियम
UGC के इन नए नियमों का असर उन छात्रों पर नहीं पड़ेगा, जिन्होंने 2026-27 से पहले MPT या MOT प्रोग्राम में एडमिशन लिया है। ऐसे छात्रों को उनकी डिग्री पहले से लागू नियमों के अनुसार ही दी जाएगी।
यानी नए नियम मुख्य रूप से 2026-27 या उसके बाद इन प्रोग्राम में दाखिला लेने वाले छात्रों पर लागू होंगे।
कई नए हेल्थकेयर डिग्री प्रोग्राम भी शामिल
UGC के पांचवें संशोधन में सिर्फ MPT और MOT में बदलाव नहीं किया गया है। एलाइड और हेल्थकेयर एजुकेशन से जुड़े कई नए और संशोधित UG तथा PG डिग्री प्रोग्राम को भी सूची में शामिल किया गया है।
इनमें बैचलर ऑफ मेडिकल लेबोरेटरी साइंस, मास्टर ऑफ मेडिकल लेबोरेटरी साइंस, मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी, हेमेटोलॉजी एंड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन, हिस्टोलॉजी और साइकोपैथोलॉजी से जुड़े मास्टर प्रोग्राम शामिल हैं।
इसके अलावा बैचलर ऑफ इमरजेंसी मेडिकल टेक्नोलॉजिस्ट, मास्टर ऑफ एडवांस्ड केयर पैरामेडिक्स और बैचलर व मास्टर ऑफ एनेस्थीसिया एंड ऑपरेशन थिएटर टेक्नोलॉजी जैसे प्रोग्राम भी सूची में जोड़े गए हैं।
33 नए प्रोग्राम और 21 में बदलाव
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, नेशनल कमीशन फॉर एलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स यानी NCAHP के नियामक ढांचे के तहत 33 नए डिग्री प्रोग्राम शामिल किए गए हैं, जबकि 21 मौजूदा UG-PG प्रोग्राम में बदलाव किया गया है।
इन बदलावों का उद्देश्य एलाइड और हेल्थकेयर क्षेत्र में डिग्री के नाम, कोर्स की अवधि और एडमिशन योग्यता को लेकर एकरूपता लाना है। UGC ने यह संशोधन UGC Act, 1956 की धारा 22(3) के तहत किया है।
यानी अब 2026-27 से MPT और MOT करने वाले छात्रों की डिग्री पहले से ज्यादा स्पष्ट होगी, क्योंकि उसमें उनकी संबंधित स्पेशलाइजेशन का भी उल्लेख किया जाएगा।