DUSU Election 2026: कौन लड़ सकता है दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ का चुनाव? जानें उम्र से लेकर अटेंडेंस तक के नियम
नई दिल्ली: दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन यानी DUSU चुनाव को लेकर हर साल कैंपस में काफी हलचल देखने को मिलती है. चुनाव के दौरान उम्मीदवार प्रचार, रैलियों और पोस्टरों के जरिए छात्रों तक अपनी बात पहुंचाते हैं. ऐसे में कई छात्रों के मन में यह सवाल रहता है कि आखिर डूसू चुनाव लड़ने के लिए क्या हर छात्र योग्य होता है या इसके लिए कुछ निर्धारित मानदंड भी हैं.
दरअसल, DUSU चुनाव में उम्मीदवारों की पात्रता को लेकर लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के आधार पर कई नियम लागू हैं. इन शर्तों को पूरा करने के बाद ही कोई छात्र चुनाव में प्रत्याशी बन सकता है.
उम्र और पढ़ाई से जुड़े नियम
चुनाव लड़ने वाले छात्र के लिए निर्धारित उम्र सीमा का पालन करना जरूरी है. इसके साथ ही पढ़ाई में नियमितता भी महत्वपूर्ण है. उम्मीदवार के लिए कम से कम 75 फीसदी अटेंडेंस का मानदंड रखा गया है.
यानी अगर किसी छात्र की उपस्थिति तय सीमा से कम है, तो उसका नामांकन स्वीकार नहीं किया जा सकता. अदालतों में भी छात्रसंघ चुनाव से जुड़े मामलों में उपस्थिति की इस शर्त को महत्वपूर्ण माना गया है. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चुनावी गतिविधियों के साथ छात्र अपनी पढ़ाई में भी नियमित रहें.
अकादमिक रिकॉर्ड होना चाहिए साफ
DUSU चुनाव लड़ने के लिए छात्र का अकादमिक रिकॉर्ड भी देखा जाता है. किसी पिछले सेमेस्टर या वर्ष में लंबित पेपर यानी बैकलॉग होने की स्थिति में उम्मीदवार की पात्रता प्रभावित हो सकती है.
इसके अलावा अनुशासन से जुड़ा रिकॉर्ड भी अहम है. कॉलेज या यूनिवर्सिटी स्तर पर गंभीर कार्रवाई या पुलिस केस जैसी स्थिति होने पर भी छात्र के चुनाव लड़ने पर रोक लग सकती है. इन नियमों का मकसद चुनाव प्रक्रिया में ऐसे उम्मीदवारों को शामिल करना है, जिनका शैक्षणिक और अनुशासनात्मक रिकॉर्ड नियमों के अनुरूप हो.
एडमिशन की तारीख भी जरूरी
सिर्फ कॉलेज में पढ़ना ही पर्याप्त नहीं है. चुनाव में उम्मीदवार बनने के लिए छात्र का संबंधित कॉलेज, विभाग या संस्थान में तय समय-सीमा के भीतर दाखिला होना जरूरी है.
हर चुनाव के दौरान विश्वविद्यालय की ओर से एक निर्धारित कट-ऑफ डेट और समय जारी किया जाता है. इस समय सीमा के बाद एडमिशन लेने वाले छात्रों को उस साल के चुनाव में वोट देने या उम्मीदवार बनने की अनुमति नहीं मिल सकती.
नए छात्रों के लिए क्या है व्यवस्था?
पहले वर्ष में दाखिला लेने वाले कई छात्रों के पास चुनाव के समय यूनिवर्सिटी का पहचान पत्र उपलब्ध नहीं होता. ऐसे मामलों में निर्धारित नियमों के अनुसार फीस रसीद, बोनाफाइड सर्टिफिकेट या अन्य वैध दस्तावेजों के आधार पर छात्र की पहचान और पात्रता साबित करने की व्यवस्था की जा सकती है.
इसलिए DUSU चुनाव में उम्मीदवार बनने की इच्छा रखने वाले छात्रों को सिर्फ प्रचार और नामांकन की तैयारी ही नहीं, बल्कि अपनी अटेंडेंस, अकादमिक रिकॉर्ड, अनुशासन और एडमिशन से जुड़े दस्तावेज भी पहले से तैयार रखने चाहिए.