×

CTET vs TET: जानें किस एग्जाम का सिलेबस है आसान, किसे निकालने में मिलेगी जल्दी सफलता!

 

अगर आप किसी प्राइवेट या सरकारी स्कूल में शिक्षक हैं और अभी तक TET या CTET पास नहीं कर पाए हैं, तो आपके लिए राहत की खबर है। CBSE ने 22वें CTET के लिए आवेदन विंडो 25 अगस्त से 1 सितंबर 2026 तक दोबारा खोल दी है। सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद इन-सर्विस टीचर्स के लिए TET पास करना जरूरी माना गया है और इसके लिए दो साल की मोहलत दी गई है।

ऐसे में जिन शिक्षकों से पहले आवेदन का मौका छूट गया था, उनके पास अब परीक्षा के लिए आवेदन करने का अवसर है। हालांकि, कई टीचर्स के मन में सवाल है कि उनके लिए State TET पास करना आसान होगा या CTET। आइए दोनों परीक्षाओं के पैटर्न, सिलेबस और पासिंग मार्क्स को समझते हैं।

स्कूल टीचर्स के लिए TET या CTET क्यों जरूरी है?

सुप्रीम कोर्ट ने TET को शिक्षक की नियुक्ति के लिए जरूरी योग्यता के तौर पर माना है। सितंबर 2025 के फैसले में कोर्ट ने कहा था कि शिक्षक पद के लिए TET की योग्यता जरूरी हो सकती है और इन-सर्विस टीचर्स पर भी इससे जुड़े नियम लागू हो सकते हैं।

CTET और State TET में क्या अंतर है?

CTET यानी Central Teacher Eligibility Test का आयोजन CBSE करता है। यह मुख्य रूप से केंद्रीय स्तर की शिक्षक भर्तियों में पात्रता के लिए इस्तेमाल होता है।

वहीं State TET अलग-अलग राज्यों की शिक्षक पात्रता परीक्षा होती है। जैसे UPTET, REET, MAHA TET, HTET, PSTET और KTET। इन परीक्षाओं का आयोजन और नियम संबंधित राज्य की एजेंसी तय करती है।

CTET और TET का एग्जाम पैटर्न

दोनों परीक्षाओं का बेसिक पैटर्न काफी हद तक समान है। दोनों में दो पेपर होते हैं।

  • पेपर 1: कक्षा 1 से 5 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए
  • पेपर 2: कक्षा 6 से 8 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए

उम्मीदवार अपनी योग्यता के अनुसार दोनों पेपर भी दे सकते हैं।

कितने सवाल और कितना समय?

CTET और ज्यादातर State TET परीक्षाओं में 150 बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाते हैं। प्रत्येक सवाल 1 अंक का होता है और परीक्षा कुल 150 अंकों की होती है।

परीक्षा के लिए 2 घंटे 30 मिनट का समय दिया जाता है। CTET में गलत जवाब के लिए निगेटिव मार्किंग नहीं होती। हालांकि, अलग-अलग State TET में नियम राज्य के अनुसार अलग हो सकते हैं।

कितने नंबर पर होती है परीक्षा पास?

CTET में सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम 60 फीसदी अंक यानी 150 में से 90 अंक जरूरी होते हैं।

आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को नियमों के अनुसार छूट मिल सकती है। State TET में क्वालिफाइंग मार्क्स संबंधित राज्य के नियमों के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं।

CTET और TET सर्टिफिकेट की वैधता

CTET सर्टिफिकेट की वैधता लाइफटाइम होती है। कई राज्यों ने भी अपने TET सर्टिफिकेट की वैधता को लाइफटाइम कर दिया है। हालांकि, State TET के मामले में उम्मीदवारों को संबंधित राज्य के मौजूदा नियम जरूर जांच लेने चाहिए।

CTET और TET का सिलेबस

पेपर 1 में मुख्य विषय:

  • बाल विकास और शिक्षाशास्त्र — 30 अंक
  • भाषा 1 — 30 अंक
  • भाषा 2 — 30 अंक
  • गणित — 30 अंक
  • पर्यावरण अध्ययन — 30 अंक

पेपर 2 में:

बाल विकास और शिक्षाशास्त्र तथा दोनों भाषाओं के अलावा 60 अंकों का विषय होता है। इसमें उम्मीदवार के अनुसार गणित-विज्ञान या सामाजिक अध्ययन/सामाजिक विज्ञान शामिल हो सकता है।

CTET का सिलेबस मुख्य रूप से NCERT के पाठ्यक्रम पर आधारित होता है। वहीं State TET में संबंधित राज्य की SCERT किताबों और स्थानीय विषयों से भी सवाल पूछे जा सकते हैं।

टीचर्स के लिए कौन-सा एग्जाम आसान?

स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए उनका क्लासरूम अनुभव CTET में काफी मददगार हो सकता है। परीक्षा में बाल विकास, शिक्षाशास्त्र और बच्चों को पढ़ाने के तरीकों से जुड़े सवाल पूछे जाते हैं। ऐसे सवालों को लंबे समय से पढ़ा रहे शिक्षक अपने अनुभव के आधार पर बेहतर तरीके से हल कर सकते हैं।

वहीं, कुछ State TET परीक्षाओं में संबंधित राज्य के पाठ्यक्रम, स्थानीय भाषा, किताबों और विषय से जुड़े तथ्यात्मक सवालों पर ज्यादा जोर हो सकता है।

CTET या State TET, किसे चुनें?

अगर आपकी क्लासरूम टीचिंग, कॉन्सेप्ट और पेडागॉजी की समझ अच्छी है, तो CTET आपके लिए आसान हो सकता है। वहीं, अगर आपको थ्योरी, स्थानीय पाठ्यक्रम और तथ्यों को याद करने में आसानी होती है, तो State TET आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकता है।

हालांकि, परीक्षा चुनने से पहले यह जरूर देखें कि आपकी नौकरी या जिस पद के लिए आप आवेदन करना चाहते हैं, उसके लिए CTET मान्य है या संबंधित State TET।