Canada Study Visa: कनाडा में पढ़ाई का सपना छोड़ रहे भारतीय छात्र, सुरक्षा और नौकरी की चिंता से अब यूरोप-अमेरिका की ओर रुख
विदेश में पढ़ाई करने का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों के बीच कनाडा की लोकप्रियता में बदलाव देखने को मिल रहा है। कभी हायर एजुकेशन के लिए भारतीय युवाओं की पहली पसंद माने जाने वाले कनाडा को लेकर अब छात्र दोबारा सोचने लगे हैं। इसकी बड़ी वजह वीजा नियमों में सख्ती, भारतीय छात्रों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं, महंगा रहन-सहन और पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी मिलने की अनिश्चितता बताई जा रही है।कई छात्र अब कनाडा के बजाय ब्रिटेन, यूरोप, अमेरिका और नॉर्वे जैसे देशों में पढ़ाई के विकल्प तलाश रहे हैं। छात्रों का कहना है कि विदेश में पढ़ाई करना एक बड़ा आर्थिक निवेश है। ऐसे में वे उसी देश को चुनना चाहते हैं, जहां पढ़ाई के साथ बेहतर करियर और भविष्य की संभावनाएं भी मिल सकें।
कनाडा जाने का प्लान टाल रहे हैं छात्र
मुंबई के नरसी मोंजी कॉलेज में पढ़ने वाले रोहन सावंत का सपना कनाडा की यॉर्क यूनिवर्सिटी, टोरंटो से BBA करने का था। लेकिन कनाडा में भारतीय छात्रों से जुड़ी घटनाओं और वीजा नियमों में बदलाव के बाद उन्होंने फिलहाल अपना प्लान टाल दिया है।रोहन के मुताबिक, हाई स्कूल के समय से ही उनका सपना कनाडा जाकर पढ़ाई करने का था। लेकिन मौजूदा परिस्थितियों ने उन्हें अपना फैसला बदलने पर मजबूर कर दिया। उनके माता-पिता ने भी सलाह दी है कि वह पहले मुंबई में अपनी ग्रेजुएशन पूरी करें और हायर एजुकेशन के लिए ब्रिटेन या यूरोप के विकल्पों पर विचार करें।
चंडीगढ़ की बायोफिजिक्स छात्रा रिदम कालिया भी कनाडा जाने को लेकर पहले जैसी उत्साहित नहीं हैं। उनका कहना है कि पढ़ाई पूरी होने के बाद नौकरी मिलने और वहां रुकने की संभावनाओं को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। अब वह अमेरिका में पढ़ाई करने के विकल्प पर विचार कर रही हैं, क्योंकि वहां रिसर्च और करियर के बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद है।
पढ़ाई के बाद नौकरी की चिंता भी बड़ी वजह
रिदम का मानना है कि कनाडा में शिक्षा और अंतरराष्ट्रीय अनुभव हासिल करने के अच्छे अवसर हैं, लेकिन विदेश में पढ़ाई करना किसी भी परिवार के लिए बड़ा निवेश होता है। ऐसे में छात्र चाहते हैं कि उनकी मेहनत और खर्च के बदले उन्हें बेहतर करियर के अवसर मिलें।
उनके मुताबिक, अगर मास्टर डिग्री पूरी करने के बाद अच्छी नौकरी नहीं मिलती है, तो इसका असर उनकी आर्थिक स्थिति और भविष्य की योजनाओं पर पड़ सकता है। इसलिए अब वह किसी भी देश का चुनाव करने से पहले वहां नौकरी और रिसर्च की संभावनाओं को अच्छी तरह समझना चाहती हैं।
कनाडा के बजाय नॉर्वे को चुन रही हैं छात्रा
पंजाब यूनिवर्सिटी की छात्रा मुस्कान ठाकुर ने भी कनाडा के बजाय अब नॉर्वे जाने का विकल्प चुना है। उनका कहना है कि वह अपनी डिग्री पूरी करने के बाद नौकरी और वहां रहने को लेकर अनिश्चितता नहीं चाहती हैं।
मुस्कान के मुताबिक, अगर कनाडा अपनी इमिग्रेशन नीतियों में पारदर्शिता लाए, छात्रों की सुरक्षा बेहतर करे और पार्ट-टाइम काम से जुड़े परमिट की प्रक्रिया आसान बनाए, तो वह भविष्य में दोबारा कनाडा जाने के बारे में सोच सकती हैं।
कनाडा के स्टूडेंट वीजा नियमों में भी हुई सख्ती
कनाडा में पढ़ाई के लिए आवेदन करने वाले भारतीय छात्रों को पिछले कुछ वर्षों में कई बदलावों का सामना करना पड़ा है। साल 2024 में कनाडा ने स्टडी परमिट के लिए जरूरी न्यूनतम बैंक बैलेंस की सीमा 10,000 कनाडाई डॉलर से बढ़ाकर 20,635 कनाडाई डॉलर कर दी थी। इससे विदेशी छात्रों, खासकर मध्यमवर्गीय परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ा।
ICEF मॉनिटर के आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय छात्रों के स्टडी वीजा रिजेक्शन की दर 2023 में 38 प्रतिशत थी, जो 2024 में बढ़कर 52 प्रतिशत हो गई। हालांकि, वीजा रिजेक्शन के पीछे कई कारण हो सकते हैं और केवल एक वजह को इसका जिम्मेदार नहीं माना जा सकता।
कनाडा जाने के लिए पूछताछ में 80% तक गिरावट का दावा
मुंबई की एजुकेशन कंसल्टेंसी जीबी एजुकेशन के मुताबिक, महंगाई, रहने के बढ़ते खर्च और सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के कारण कनाडा में पढ़ाई के लिए आने वाली पूछताछ में करीब 80 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
कंसल्टेंट्स के अनुसार, पहले ज्यादातर परिवार यह जानना चाहते थे कि कनाडा कैसे जाया जा सकता है, लेकिन अब उनका सवाल बदल गया है। वे जानना चाहते हैं कि मौजूदा हालात में कनाडा जाना उनके बच्चों के भविष्य के लिए सही फैसला होगा या नहीं।