ईरान-इज़राइल युद्ध का असर उदयपुर के हैंडीक्राफ्ट कारोबार पर, व्यापारियों ने जताई चिंता
मध्य पूर्व में जारी ईरान-इज़राइल संघर्ष का सीधा असर अब भारत के स्थानीय निर्यात कारोबार पर भी दिखाई देने लगा है। राजस्थान के उदयपुर का प्रसिद्ध हैंडीक्राफ्ट उद्योग इस वैश्विक तनाव से प्रभावित हुआ है, जिससे व्यापारियों में चिंता का माहौल है।
उद्योग से जुड़े व्यापारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता बढ़ने के कारण ऑर्डर प्रभावित हो रहे हैं और निर्यात की गति धीमी पड़ गई है। उनका दावा है कि इस स्थिति का असर केवल कुछ दिनों या हफ्तों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह लंबे समय तक कारोबार को प्रभावित कर सकता है।
पहले से ही दबाव में था कारोबार
व्यापारियों के अनुसार, उदयपुर का हैंडीक्राफ्ट सेक्टर पहले से ही वैश्विक आर्थिक दबावों का सामना कर रहा था। अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ और रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण सप्लाई चेन और अंतरराष्ट्रीय मांग पर पहले ही असर पड़ा था। अब ईरान-इज़राइल संघर्ष ने स्थिति को और अधिक जटिल बना दिया है।
निर्यात और ऑर्डर पर असर
स्थानीय निर्यातकों का कहना है कि कई विदेशी खरीदारों ने फिलहाल नए ऑर्डर रोक दिए हैं या उन्हें टाल दिया है। कुछ पुराने ऑर्डर भी शिपमेंट में देरी का सामना कर रहे हैं। इससे कारीगरों और छोटे व्यापारियों की आय पर भी असर पड़ने की आशंका है।उदयपुर का हैंडीक्राफ्ट सेक्टर, जो लकड़ी की नक्काशी, मार्बल आर्ट, मेटल क्राफ्ट और पारंपरिक सजावटी वस्तुओं के लिए जाना जाता है, विदेशों में बड़ी मांग रखता है। लेकिन वैश्विक अस्थिरता के चलते इस मांग में गिरावट देखी जा रही है।
व्यापारियों की मांग
व्यापारियों ने सरकार से मांग की है कि निर्यातकों के लिए विशेष राहत पैकेज और वित्तीय सहायता की व्यवस्था की जाए, ताकि इस वैश्विक संकट के दौर में स्थानीय उद्योग को स्थिर रखा जा सके।
आगे की अनिश्चितता
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय तनाव लंबा चलता है तो इसका असर भारतीय हस्तशिल्प उद्योग पर भी गहरा पड़ सकता है। ऐसे में उदयपुर के कारीगरों और निर्यातकों के लिए आने वाला समय चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।फिलहाल, उदयपुर का हैंडीक्राफ्ट सेक्टर वैश्विक घटनाओं की अनिश्चितता के बीच अपने कारोबार को संभालने की कोशिश में जुटा हुआ है।