राजस्थान हाईकोर्ट ने हल्दीघाटी दर्रा और रक्त तलाई की दुर्दशा पर कड़ा संज्ञान लिया
राजस्थान हाईकोर्ट ने मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास के प्रतीक हल्दीघाटी दर्रा और रक्त तलाई की दुर्दशा पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए स्वतः संज्ञान याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने ऐतिहासिक स्थलों के “पिकनिक स्पॉट” में तब्दील होने और प्रशासनिक उदासीनता पर अपनी नाराजगी जाहिर की।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह स्थलों का केवल पर्यटन स्थल या मनोरंजन केंद्र के रूप में उपयोग नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने कहा कि हल्दीघाटी और रक्त तलाई जैसे ऐतिहासिक स्थल राजस्थान के गौरव और सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा हैं और इनकी उपेक्षा करना सीधे तौर पर कर्तव्य की अनदेखी के समान है।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने प्रशासनिक अधिकारियों को चेतावनी दी कि यदि इन स्थलों की सुरक्षा, सफाई और संरक्षण के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो न्यायालय कानूनी कार्रवाई का विकल्प अपनाने से भी नहीं हिचकिचाएगा। कोर्ट ने कहा कि सरकारी उदासीनता के चलते ऐतिहासिक महत्व और राष्ट्रीय गौरव को नुकसान पहुंच रहा है।
स्वतः संज्ञान याचिका में प्रस्तुत किया गया कि हल्दीघाटी दर्रा और रक्त तलाई के आसपास पर्यटन सुविधाओं के नाम पर अतिक्रमण और अनुचित उपयोग बढ़ता जा रहा है। याचिका में यह भी बताया गया कि पिकनिक और निजी आयोजनों के कारण स्थलों की साफ-सफाई और संरचना को नुकसान पहुँच रहा है, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए यह धरोहर खतरे में पड़ रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि हल्दीघाटी का ऐतिहासिक महत्व केवल 1576 की हल्दीघाटी युद्ध की स्मृति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मेवाड़ की वीरता और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक भी है। उन्होंने कहा कि यदि इसे अनियंत्रित पर्यटन और निजी मनोरंजन के लिए छोड़ दिया गया, तो यह स्थल इतिहास और राष्ट्रीय गौरव का अपमान बन सकता है।
स्थानीय प्रशासन ने मीडिया को बताया कि हाईकोर्ट के संज्ञान के बाद सुरक्षा और संरक्षा उपायों की समीक्षा शुरू कर दी गई है। अधिकारियों ने कहा कि आगामी दिनों में सुरक्षा बाड़, पर्यटक मार्ग और सूचना बोर्ड स्थापित करने के साथ-साथ स्थलों की सफाई और संरक्षण के लिए विशेष टीम गठित की जाएगी।
राजस्थान हाईकोर्ट के इस कड़े रुख से न केवल प्रशासन बल्कि पर्यटन विभाग और स्थानीय समुदाय के लिए भी यह एक चेतावनी है कि ऐतिहासिक स्थलों का संरक्षण सिर्फ दिखावा या मनोरंजन नहीं होना चाहिए। यह न्यायालय की यह पहल राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर को बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
इस तरह, हल्दीघाटी दर्रा और रक्त तलाई की दुर्दशा पर हाईकोर्ट का संज्ञान ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर समाज में जागरूकता बढ़ाने वाला कदम साबित हो रहा है।