उदयपुर के मेवाड़ शाही परिवार में संपत्ति विवाद: लक्ष्याराज सिंह मेवाड़ और पद्मजा कुमारी के बीच कानूनी जंग तेज
उदयपुर के पूर्व राजघराने मेवाड़ फैमिली में संपत्ति और उत्तराधिकार को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। यह विवाद राजघराने के दो भाई‑बहन Lakshyaraj Singh Mewar और Padmaja Kumari Parmar के बीच चल रहा है, जो उनके late पिता अरविंद सिंह मेवाड़ की संपत्ति के अधिकार को लेकर है। इस मुद्दे पर हाल ही में दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने एक अहम फैसला सुनाया है, जिससे मामला और गंभीर रूप ले रहा है।
विवाद का कारण
यह संपत्ति विवाद उस समय शुरू हुआ जब उनके पिता अरविंद सिंह मेवाड़ के निधन के बाद उनके द्वारा छोड़ी गई संपत्ति के नियंत्रण को लेकर दोनों Geschwister अलग‑अलग दावे पेश करने लगे। लक्ष्याराज सिंह मेवाड़ ने दावा किया है कि उनके पिता ने वसीयत में उन्हें अपनी स्वयं‑अर्जित (self‑acquired) संपत्तियों का एकमात्र उत्तराधिकारी बताया था। इन्हीं संपत्तियों में उदयपुर का सिटी पैलेस, HRH Hotels Group जैसे प्रॉपर्टीज़ शामिल हैं, जो राजघराना चलाता है।
पद्मजा कुमारी ने इस वसीयत को विवादित बताते हुए कहा कि यह दस्तावेज़ उनके पिता द्वारा मानसिक रूप से अस्थिर समय में बनाया गया तथा उस पर अनुचित प्रभाव का आरोप लगाया है। इसी आधार पर उन्होंने अपने पक्ष में निर्णय की मांग की।
दिल्ली उच्च न्यायालय का नवीन निर्णय
हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट ने पद्मजा कुमारी की “वसीयत के बिना प्रशासक के पत्र” (Letters of Administration) की याचिका को मज़बूत नहीं मानते हुए खारिज कर दिया है। न्यायालय ने कहा कि उनके द्वारा उठाए गए सभी कानूनी आपत्तियाँ वास्तव में उनके भाई द्वारा दायर मुख्य फ़ैसले के मामले में ही उठाई जा सकती हैं और उन्हें उसी प्रक्रिया में शामिल होना चाहिए। अदालत ने यह रुख अपनाया कि अगर वसीयत को चुनौती दी जानी है, तो यह केवल मूल मुकदमे के भीतर ही किया जाना चाहिए, न कि अलग से मामला बनाकर।
न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि पद्मजा कुमारी अपनी सभी आपत्तियाँ उसी फाइल में उठाएँ जहाँ लक्ष्याराज सिंह मेवाड़ ने “वसीयत और प्रशासक के पत्रों” को प्रस्तुत किया है। इससे साफ होता है कि अदालत इस विवाद को एकीकृत तरीके से देखने को प्राथमिकता दे रही है।
मामला लंबे समय से जारी
दरअसल यह विवाद बेहद पुराना है और दशकों से चल रहा है। वर्ष 2020 में उदयपुर जिला न्यायालय ने राजपरिवार की संपत्ति को चार हिस्सों में विभाजित करने का आदेश दिया था, लेकिन उच्च न्यायालय के आदेश ने इसे स्थगित कर रखा है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित मामलों को दिल्ली हाई कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया, ताकि सब मुकदमे एक मंच पर सुने जा सकें।
इस विवाद के केंद्र में उदयपुर के ऐतिहासिक सिटी पैलेस, HRH Hotels और अन्य परिवार‑संपत्तियाँ हैं, जो राजपरिवार की विरासत और प्रबंधन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इन संपत्तियों का नियंत्रण राजघराने की प्रतिष्ठा, व्यवसाय और विरासत दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
भविष्य में क्या होगा?
अब जब दिल्ली उच्च न्यायालय ने पद्मजा की याचिका को केंद्र के मुकदमे में शामिल होने का निर्देश दिया है, तो इस लड़ाई का अगला मुक़र्रर किस तरह से होता है, यह मुख्य रूप से अदालत की अगली सुनवाई में तय होगा। दोनों पक्षों के वकील पहले से ही कोर्ट में वसीयत के वैधता, उत्तराधिकार के अधिकार और प्रशासनिक फैसलों के आधार पर बहस कर रहे हैं।
यह विवाद पारिवारिक रिश्तों के साथ‑साथ भारत के पुराने राजपरिवारों में उत्तराधिकार के कानूनी ढांचे को भी चुनौती दे रहा है, जो पेशेवर विरासत और आधुनिक कानून के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास करता है।