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करणी सेना प्रमुख मकराना का तीखा बयान, वीडियो में बोले— महापुरुषों के अपमान पर चुप नहीं बैठेंगे, राजनीति में उतरने का ऐलान

 

उदयपुर में श्री राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने एक बार फिर कड़े तेवर दिखाए हैं। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप और राणा सांगा जैसे महापुरुषों का यदि कोई अपमान करेगा तो करणी सेना चुपचाप नहीं बैठेगी। मकराना ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि ऐसे लोगों पर कार्रवाई करने की ताकत करणी सेना रखती है। उनके इस बयान से राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

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महिपाल सिंह मकराना शुक्रवार को उदयपुर में देवड़ा नोबल्स सोसाइटी मेवाड़ की ओर से आयोजित डीपीएल-6 क्रिकेट प्रतियोगिता में शामिल होने पहुंचे थे। कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत में उन्होंने यह बयान दिया। मकराना ने साफ कहा कि महाराणा प्रताप और राणा सांगा जैसे ऐतिहासिक महापुरुषों के सम्मान से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि कोई इन महापुरुषों के खिलाफ बोलेगा तो करणी सेना उसे बर्दाश्त नहीं करेगी।

करणी सेना के राजनीति में प्रवेश को लेकर भी मकराना ने बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि करणी सेना अब राजनीति में आएगी और इस पर फैसला हो चुका है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि संगठन किस रूप में या कब राजनीतिक मैदान में उतरेगा। मकराना ने कहा कि करणी सेना किसी भी राजनीतिक दल की बंधुआ नहीं है और न ही किसी के दबाव में काम करती है। उन्होंने कहा कि “नेतागिरी करने वाले लोग अपनी राजनीति करते होंगे, लेकिन करणी सेना अपने स्वाभिमान और सिद्धांतों पर काम करती है।”

अपने बयान में मकराना ने पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि गोगुंदा में दिए गए बयान को लेकर गुलाबचंद कटारिया ने माफी मांगी है और इससे पहले भी इस मुद्दे पर खेद जता चुके हैं। मकराना ने इसे करणी सेना और समाज के दबाव का परिणाम बताया।

करणी सेना प्रमुख ने दोहराया कि महाराणा प्रताप और राणा सांगा केवल इतिहास के पात्र नहीं, बल्कि राजपूत समाज की अस्मिता और गौरव के प्रतीक हैं। उनके सम्मान से खिलवाड़ करने वालों को करणी सेना जवाब देना जानती है। उन्होंने कहा कि संगठन की ताकत और उसका जनाधार किसी से छिपा नहीं है।

महिपाल सिंह मकराना के इस बयान के बाद यह साफ हो गया है कि आने वाले समय में करणी सेना न केवल सामाजिक मुद्दों पर, बल्कि राजनीतिक मंच पर भी सक्रिय भूमिका निभा सकती है। संगठन के राजनीति में उतरने की घोषणा से राजस्थान की सियासत में नए समीकरण बनने की संभावना जताई जा रही है।