उदयपुर में किसानों को मिलेगी लो-टनल तकनीक की सुविधा, 4 ब्लॉक में 12 हजार वर्गमीटर का लक्ष्य
खेती में मौसम की अनिश्चितता के कारण फसलों को होने वाले नुकसान से बचाने और किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए उद्यान विभाग ने नई पहल शुरू की है। राज्य योजना के तहत अब उदयपुर जिले के किसानों को लो-टनल तकनीक अपनाने का मौका मिलेगा। इसके लिए जिले के चार ब्लॉकों में कुल 12 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में लो-टनल विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
लो-टनल तकनीक का इस्तेमाल फसलों को प्रतिकूल मौसम से बचाने के लिए किया जाता है। इसके जरिए पौधों को ठंड, तेज हवा, पाला और तापमान में अचानक होने वाले बदलाव से सुरक्षा मिल सकती है। साथ ही सब्जियों और अन्य फसलों की शुरुआती अवस्था में बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने में भी यह तकनीक उपयोगी मानी जाती है।
उद्यान विभाग की इस पहल का उद्देश्य किसानों को पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ना है। मौसम में लगातार हो रहे बदलावों के कारण किसानों के सामने फसल उत्पादन और गुणवत्ता बनाए रखने की चुनौती रहती है। लो-टनल तकनीक इस चुनौती से निपटने में किसानों की मदद कर सकती है।
योजना के तहत उदयपुर जिले के चार ब्लॉकों में चयनित किसानों को लो-टनल तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। कुल 12 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में इसका लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इससे किसानों को संरक्षित खेती की तकनीक का अनुभव मिलेगा और प्रतिकूल मौसम के दौरान फसल को सुरक्षा देने में मदद मिलेगी।
लो-टनल के जरिए खेती करने से फसल के आसपास का वातावरण नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। इससे पौधों की शुरुआती वृद्धि बेहतर हो सकती है और कुछ मौसमी जोखिमों को कम किया जा सकता है। सब्जी उत्पादन करने वाले किसानों के लिए यह तकनीक विशेष रूप से उपयोगी हो सकती है।
उद्यान विभाग की यह पहल किसानों की आय और उत्पादन क्षमता बढ़ाने के प्रयासों का हिस्सा है। योजना के सफल क्रियान्वयन से उदयपुर जिले में संरक्षित खेती को बढ़ावा मिलने और किसानों के बीच आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रति जागरूकता बढ़ने की उम्मीद है