पिछोला झील में फिर दौड़ेगा डबल डेकर क्रूज, सोलर ऊर्जा से होगा संचालन; वेस्ट मैनेजमेंट को लेकर उठे सवाल
झीलों की नगरी उदयपुर की खूबसूरती में जल्द ही एक बार फिर डबल डेकर क्रूज चार चांद लगाता नजर आएगा। पिछोला झील में पिछले पांच वर्षों से बंद पड़ा डबल डेकर क्रूज अब दोबारा संचालन के लिए तैयार है। जिला प्रशासन और नगर निगम ने इसे फिर से चलाने के लिए हरी झंडी दे दी है। हालांकि, क्रूज के संचालन को लेकर जहां पर्यटन कारोबारियों में उत्साह है, वहीं पर्यावरण और वेस्ट मैनेजमेंट को लेकर कई सवाल भी खड़े हो गए हैं।
प्रशासन का दावा है कि इस बार क्रूज पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल होगा। इसे पेट्रोल-डीजल की बजाय सोलर ऊर्जा से संचालित किया जाएगा, जिससे झील में प्रदूषण नहीं फैलेगा। साथ ही, इसमें किसी तरह के कमरे या बंद संरचनाएं नहीं बनाई जाएंगी, ताकि इसे केवल पर्यटन गतिविधियों तक सीमित रखा जा सके।
अधिकारियों के मुताबिक, डबल डेकर क्रूज में एक साथ करीब 150 यात्री सवार हो सकेंगे। पर्यटक झील में कई घंटों तक भ्रमण कर सकेंगे और उदयपुर के ऐतिहासिक महलों, घाटों और प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद ले सकेंगे। माना जा रहा है कि इससे शहर के पर्यटन उद्योग को नई रफ्तार मिलेगी और स्थानीय रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
गौरतलब है कि पिछोला झील उदयपुर की पहचान है और हर साल लाखों सैलानी यहां घूमने आते हैं। ऐसे में क्रूज सेवा शुरू होने से पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। होटल और ट्रैवल कारोबार से जुड़े लोग इसे सकारात्मक कदम मान रहे हैं।
हालांकि, इस योजना के साथ सबसे बड़ा सवाल वेस्ट और ड्रेनेज प्रबंधन को लेकर उठ रहा है। एक साथ 150 लोगों के कई घंटों तक झील में रहने के दौरान निकलने वाले कचरे, प्लास्टिक और अन्य अपशिष्ट के निस्तारण को लेकर अब तक स्पष्ट व्यवस्था सामने नहीं आई है। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि यदि वेस्ट मैनेजमेंट की ठोस योजना नहीं बनाई गई तो इससे झील की स्वच्छता और पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
स्थानीय संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि क्रूज में कचरा संग्रहण, शौचालय अपशिष्ट प्रबंधन और सीवेज ट्रीटमेंट की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही, नियमित मॉनिटरिंग और सख्त नियम लागू किए जाएं, ताकि झील की पवित्रता और सुंदरता बनी रहे।
अब देखना होगा कि प्रशासन पर्यावरणीय चिंताओं का समाधान कैसे करता है। फिलहाल, उदयपुरवासियों और पर्यटकों की नजरें इस बहुप्रतीक्षित क्रूज सेवा पर टिकी हैं, जो पर्यटन और पर्यावरण के बीच संतुलन की नई परीक्षा साबित हो सकती है।