राजनीति और नेताओं की विश्वसनीयता पर संकट, फुटेज में देखें राजनाथ सिंह बोले - इसे चुनौती के रूप में स्वीकार कर सामना करो
केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि देश में राजनीति और नेताओं के प्रति विश्वास का संकट पैदा हुआ है। इस क्राइसिस और विश्वसनीयता के संकट को हमें एक बड़ी चुनौती के रूप में स्वीकार करना होगा और इससे पार पाने के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे। राजनाथ सिंह शुक्रवार को उदयपुर में विद्या प्रचारिणी सभा और बीएन संस्थान के 104वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे।
रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि लोकतंत्र की मजबूती जनता के विश्वास पर टिकी होती है। यदि जनता का भरोसा राजनीति और नेताओं से उठता है, तो यह पूरे लोकतांत्रिक तंत्र के लिए खतरे की घंटी है। उन्होंने कहा कि आज की राजनीति में नैतिक मूल्यों और सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता की पहले से कहीं अधिक आवश्यकता है। नेताओं को अपने आचरण और कार्यशैली से जनता का विश्वास जीतना होगा।
इस दौरान राजनाथ सिंह ने हाल ही में दिल्ली में हुए धमाके का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि लाल किले के पास हुए बम धमाके की जांच में ऐसे लोगों के नाम सामने आए, जिन्हें समाज में पढ़ा-लिखा और सभ्य माना जाता था। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे लोग डॉक्टर थे, जो अपनी पर्ची पर आरएक्स लिखा करते थे, लेकिन उनके पास आरडीएक्स मिला। यह बेहद चिंताजनक है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि केवल ज्ञान होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि ज्ञान के साथ संस्कार होना भी उतना ही जरूरी है। शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि अच्छे इंसान और जिम्मेदार नागरिक तैयार करना होना चाहिए।
रक्षा मंत्री ने देश की आर्थिक और सामरिक प्रगति पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि भारत तेजी से विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है और वर्ष 2030 तक दुनिया की टॉप-3 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो जाएगा। उन्होंने कहा कि आज भारत न केवल आर्थिक क्षेत्र में बल्कि रक्षा क्षेत्र में भी अभूतपूर्व प्रगति कर रहा है। रक्षा मंत्री ने बताया कि डिफेंस सेक्टर में भारत ने बड़ी छलांग लगाई है और हथियार निर्माण के मामले में देश तेजी से आत्मनिर्भर बन रहा है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि एक समय था जब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की बातों को गंभीरता से नहीं लिया जाता था, लेकिन आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। आज भारत की एक मजबूत वैश्विक पहचान है और जब भारत बोलता है, तो दुनिया ध्यान से सुनती है। यह बदलाव देश की बढ़ती आर्थिक ताकत, मजबूत रक्षा क्षमता और स्पष्ट विदेश नीति का परिणाम है।
उन्होंने शिक्षा संस्थानों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला और कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहना चाहिए। विद्यार्थियों में राष्ट्रभक्ति, नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी के संस्कार भी विकसित किए जाने चाहिए। उन्होंने विद्या प्रचारिणी सभा और बीएन संस्थान को 104 वर्ष पूरे होने पर बधाई देते हुए कहा कि इस तरह के संस्थानों ने देश को दिशा देने वाले अनेक प्रतिभाशाली व्यक्तित्व दिए हैं।