उदयपुर-अहमदाबाद हाईवे पर 5 ब्लैक स्पॉट होंगे खत्म, वीडियो में जानें MLA बोले- बारिश से हाईवे पर हादसे हुए
जिले में बढ़ते सड़क हादसों को देखते हुए उदयपुर जिला परिषद सभागार में आज एक महत्वपूर्ण सड़क सुरक्षा समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता उदयपुर के सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने की, जिन्होंने जिले से गुजरने वाले उदयपुर-पिंडवाड़ा नेशनल हाईवे पर हो रहे लगातार हादसों पर गहरी चिंता जाहिर की।
सांसद रावत ने बैठक में बताया कि इस हाईवे पर चिह्नित 6 ब्लैक स्पॉट्स के कारण सबसे ज्यादा दुर्घटनाएं हो रही हैं। उन्होंने इस गंभीर विषय को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के समक्ष भी उठाया है। रावत ने बताया कि ब्लैक स्पॉट्स के सुधार और सड़क सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार द्वारा लगभग 100 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत कर दी गई है। इस राशि से इन खतरनाक स्थलों पर आवश्यक निर्माण कार्य, सड़क चौड़ीकरण, सिग्नलिंग, संकेतक बोर्ड और अन्य सुरक्षा उपाय किए जाएंगे।
बैठक में सड़क सुरक्षा से जुड़े विभिन्न विभागों के अधिकारी, जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, परिवहन विभाग, लोक निर्माण विभाग और नगर निकायों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। सभी ने अपने-अपने विभागों की ओर से उठाए जा रहे सुरक्षा कदमों की जानकारी दी और सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
सांसद रावत ने यह भी कहा कि सड़क हादसे केवल तकनीकी खामियों की वजह से नहीं, बल्कि लोगों की लापरवाही और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी से भी होते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि जनता को जागरूक करने के लिए स्कूल, कॉलेजों और पंचायत स्तर पर विशेष अभियान चलाए जाने चाहिए। इसके साथ ही सड़क किनारे अतिक्रमण, बिना लाइसेंस के वाहन संचालन और ओवरलोडिंग पर भी सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
बैठक में पुलिस अधीक्षक ने कहा कि जिले में यातायात नियमों के उल्लंघन पर अब डिजिटल चालान की प्रक्रिया को तेज किया जाएगा और हाईवे पर विशेष पेट्रोलिंग टीम तैनात की जाएगी। लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि ब्लैक स्पॉट्स पर निर्माण कार्य जल्द शुरू किया जाएगा।
बैठक के अंत में यह निर्णय लिया गया कि अगले एक महीने के भीतर ब्लैक स्पॉट्स के सुधार कार्य की प्रगति की समीक्षा के लिए पुनः बैठक आयोजित की जाएगी। साथ ही, प्रत्येक विभाग को अपनी जिम्मेदारी के तहत कार्यों को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए गए।
यह बैठक न केवल सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता का संकेत है, बल्कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की गंभीरता को भी दर्शाती है, जिससे जिले में सड़क दुर्घटनाओं में निश्चित रूप से कमी आने की उम्मीद की जा सकती है।