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नरेश मीणा की वन विभाग को चेतावनी- किसानों को परेशान किया तो सरकारी दफ्तरों में लगा दूंगा आग: बारां में चुनावी सभा के दौरान अधिकारियों को दी चेतावनी

 

राजस्थान के बारां जिले में पंचायत चुनाव के बीच नेता नरेश मीणा का एक विवादित बयान सामने आया है। अपने प्रत्याशियों के समर्थन में चुनावी सभा करने पहुंचे नरेश मीणा ने वन विभाग के अधिकारियों पर किसानों को नाजायज परेशान करने का आरोप लगाया। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि किसानों पर किसी तरह का अत्याचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर किसानों को परेशान किया गया तो सरकारी दफ्तरों में आग लगा दी जाएगी।

नरेश मीणा के इस बयान के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है। चुनावी सभा में उन्होंने किसानों की समस्याओं को उठाते हुए वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और सरकारी विभागों के अधिकारी उन्हें राहत देने के बजाय परेशान कर रहे हैं।

वन विभाग पर किसानों को परेशान करने का आरोप

सभा को संबोधित करते हुए नरेश मीणा ने आरोप लगाया कि वन विभाग के अधिकारी किसानों के साथ उचित व्यवहार नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई जगह किसानों को उनकी जमीन और खेती से जुड़े मामलों में परेशान किया जा रहा है। किसानों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन्हें सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

किसानों पर अत्याचार बर्दाश्त नहीं होगा'

नरेश मीणा ने अपने संबोधन में कहा कि किसानों के साथ किसी भी तरह का अत्याचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि अगर वन विभाग के अधिकारियों ने किसानों को परेशान करना बंद नहीं किया तो इसका विरोध किया जाएगा।

इसी दौरान उन्होंने सरकारी दफ्तरों में आग लगाने की धमकी भी दी। उनके इस बयान को लेकर विवाद की स्थिति बन सकती है। सार्वजनिक मंच से सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की धमकी दिए जाने के बाद प्रशासन की प्रतिक्रिया पर भी नजर रहेगी।

पंचायत चुनाव के बीच किसानों का मुद्दा उठाया

बारां जिले में पंचायत चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। विभिन्न राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों के समर्थन में नेता ग्रामीण क्षेत्रों में सभाएं कर रहे हैं। इसी क्रम में नरेश मीणा भी अपने समर्थित प्रत्याशियों के पक्ष में प्रचार करने पहुंचे थे।

सभा में उन्होंने स्थानीय मुद्दों के साथ किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। वन विभाग और किसानों के बीच जमीन तथा खेती से जुड़े विवाद ग्रामीण इलाकों में अक्सर चर्चा का विषय रहते हैं।