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अवैध विस्फोटक सामग्री से खतरे में आम जनता और पशु, गौसेवकों ने उठाया अलर्ट

 

क्षेत्र में लंबे समय से अवैध रूप से विस्फोटक सामग्री रखने का आरोप गौसेवकों और स्थानीय समाज के लोगों ने लगाया है। उनका कहना है कि यह सामग्री केवल कानून व्यवस्था के लिए खतरा नहीं है, बल्कि इससे पालतू पशु और वन्य जीव भी गंभीर रूप से घायल हो रहे हैं।

गौसेवकों ने बताया कि विस्फोटक सामग्री खेतों, आम रास्तों और खुले इलाकों में रखी जा रही है। इसी कारण कई बार छोटे धमाके होने की घटनाएं भी सामने आई हैं, जिससे किसान, मजदूर और राहगीर जोखिम में पड़ते हैं। उनका कहना है कि लोग अक्सर खेतों में काम करने के दौरान या पैदल मार्ग से गुजरते समय अप्रत्याशित धमाकों का शिकार हो सकते हैं।

स्थानीय गौसेवक समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि उन्होंने कई बार प्रशासन और पुलिस को इस संबंध में चेतावनी दी, लेकिन अभी तक सुरक्षा उपाय प्रभावी रूप से लागू नहीं किए गए। उनका कहना है कि यदि जल्द कदम नहीं उठाए गए तो किसी भी समय गंभीर हादसा हो सकता है।

गौसेवकों ने चेतावनी दी कि यह केवल पशुओं की सुरक्षा का मामला नहीं है। विस्फोटक सामग्री के कारण वन्य जीवों का जीवन, खेतों में काम करने वाले किसानों की सुरक्षा और राहगीरों की जान खतरे में है। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई नहीं की, तो वे समाज और स्थानीय नागरिकों के साथ मिलकर प्रदर्शन और आंदोलन करने को मजबूर हो सकते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि अवैध विस्फोटक सामग्री न केवल स्थानीय सुरक्षा को चुनौती देती है, बल्कि यह कानून और秩序 के लिए भी गंभीर खतरा है। यदि सही समय पर निगरानी और बरामदगी नहीं की गई तो इससे अनहोनी घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है।

स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इलाके में निगरानी बढ़ा दी गई है और संदिग्ध सामग्री की पहचान के लिए विशेष टीमें तैनात की जा रही हैं। उन्होंने आम जनता से अपील की है कि यदि किसी को संदिग्ध वस्तुएं या विस्फोटक दिखाई दें, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें और खुद कोई जोखिम न लें।

गौसेवकों ने प्रशासन से यह भी मांग की है कि अवैध विस्फोटक सामग्री को बरामद करने और भविष्य में इसे रोकने के लिए कड़ा कानून और निगरानी व्यवस्था लागू की जाए। उनका कहना है कि सिर्फ चेतावनी देने से काम नहीं चलेगा, सख्त कार्रवाई आवश्यक है।

इस प्रकार, क्षेत्र में अवैध विस्फोटक सामग्री के चलते न केवल पशु और वन्य जीवों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं, बल्कि आम जनता और किसानों की जिंदगी भी जोखिम में है। गौसेवकों और स्थानीय समाज का कहना है कि यदि प्रशासन जल्द कदम नहीं उठाता है, तो वे समाज और मीडिया के माध्यम से इस गंभीर मुद्दे को उच्च स्तर पर उठाने को मजबूर होंगे।