टोंक में नगर परिषद की टीम पर लाठियों से हमला, वीडियो में देखें राजस्व अधिकारी समेत 6 कर्मचारी घायल
टोंक शहर से एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आई है। मंगलवार को गाड़िया लोहार समाज को भूमि आवंटन के लिए जमीन चिन्हित करने गई नगर परिषद की टीम पर अज्ञात बदमाशों ने अचानक हमला कर दिया। इस हमले में नगर परिषद की गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई, कई वाहनों के शीशे तोड़ दिए गए, और टीम के सदस्यों के साथ मारपीट की गई।
घटना में राजस्व अधिकारी समेत कुल 6 कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जिन्हें तत्काल जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं मौके पर अफरा-तफरी और भय का माहौल बना रहा।
जमीन आवंटन के दौरान हुआ विवाद
नगर परिषद की टीम गाड़िया लोहार समुदाय के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया के तहत चिन्हित जमीन का निरीक्षण करने पहुंची थी। बताया जा रहा है कि इसी दौरान कुछ स्थानीय तत्वों ने वहां पहुंचकर टीम के साथ बहस शुरू कर दी, जो देखते ही देखते हिंसा में बदल गई।
हमलावरों ने किया जमकर उत्पात
हमलावरों ने न केवल सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचाया, बल्कि टीम के सदस्यों को भी नहीं बख्शा। चश्मदीदों के अनुसार, हमलावरों के पास लाठी-डंडे और पत्थर थे, जिनसे उन्होंने अचानक हमला कर दिया। घटना के बाद हमलावर मौके से फरार हो गए।
प्रशासनिक अमले में हड़कंप
घटना के बाद टोंक जिला प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और स्थिति पर नियंत्रण पा लिया गया है। पुलिस ने अज्ञात हमलावरों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और इलाके में सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।
जिला कलेक्टर और एसपी मौके पर पहुंचे
घटना की गंभीरता को देखते हुए टोंक जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक खुद मौके पर पहुंचे और घायल कर्मचारियों से मुलाकात की। जिला प्रशासन ने इस घटना को “लोकसेवकों पर हमला” मानते हुए सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
राजनीतिक हलकों में भी प्रतिक्रिया
इस घटना को लेकर राजनीतिक हलकों में भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कई जनप्रतिनिधियों ने इस हमले की कड़ी निंदा की है और दोषियों को तत्काल गिरफ्तार करने की मांग की है।
सामाजिक संगठन भी हुए सक्रिय
गाड़िया लोहार समाज के नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से अपील की है कि भूमि आवंटन की प्रक्रिया को जल्द और सुरक्षित तरीके से पूरा किया जाए, ताकि समुदाय को उसका हक मिल सके और ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़े किए हैं कि जब सरकारी टीमें भी सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जा सकती है। प्रशासन पर अब दबाव है कि वह जल्द से जल्द दोषियों को गिरफ्तार कर न्याय दिलाए।