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श्रीगंगानगर में फिरौती और धमकी के मामलों में बीकानेर रेंज में सबसे ऊपर

 

पुलिस भले ही जिले में गैंगस्टर गतिविधियों पर लगाम कसने के दावे करती रही हो, लेकिन बीकानेर संभाग मुख्यालय से जारी ताज़ा आंकड़े इस दावे के विपरीत चिंता पैदा कर रहे हैं। वर्ष 2025 में फिरौती के लिए फायरिंग और फोन कॉल के जरिए धमकी देने के मामलों में श्रीगंगानगर जिला पूरे बीकानेर रेंज में सर्वाधिक मामलों वाला जिला रहा।

बीकानेर रेंज के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में श्रीगंगानगर में इस प्रकार की घटनाओं की संख्या अन्य जिलों के मुकाबले कहीं अधिक दर्ज की गई। इन मामलों में अपराधी आम नागरिकों, व्यवसायियों और छोटे उद्योगपतियों को निशाना बना रहे थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, धमकियों और फायरिंग की घटनाओं में वृद्धि ने नागरिकों में भय का माहौल बना दिया है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पिछले कुछ सालों में जिले में अपराध की प्रवृत्ति बढ़ी है। कई लोग बताते हैं कि अपराधी अब पहले की तुलना में सावधानी और चालाकी से अपराध कर रहे हैं, जिससे पकड़ना और भी मुश्किल हो गया है। “हमें डर है कि कहीं हम भी किसी के निशाने पर न आ जाएं। पुलिस कार्रवाई धीमी महसूस हो रही है,” एक व्यापारी ने कहा।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जिले में सुरक्षा व्यवस्था लगातार कड़ी की जा रही है। उन्होंने बताया कि गश्त बढ़ाई गई है, संदिग्धों की निगरानी की जा रही है, और क्राइम ब्रांच सक्रिय है। लेकिन आंकड़े दर्शाते हैं कि अपराधियों ने नई तकनीक और रणनीति अपनाकर नागरिकों को परेशान करना जारी रखा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि श्रीगंगानगर में अपराध बढ़ने के कई कारण हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा प्रणालियों की कमियां, नागरिकों की सतर्कता में कमी और आर्थिक दबाव अपराधियों को प्रेरित करते हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि पुलिस को केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि प्रिवेंटिव उपाय, जागरूकता अभियान और टेक्नोलॉजी आधारित निगरानी भी बढ़ानी चाहिए।

बीकानेर रेंज के आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि फायरिंग और फोन कॉल के जरिए धमकी देने के मामलों में अधिकांश अपराध आर्थिक लाभ और सत्ता हासिल करने के लिए किए गए। इसके चलते नागरिकों की सुरक्षा और उनकी मानसिक शांति पर भी प्रभाव पड़ा है।

स्थानीय प्रशासन ने इस स्थिति को गंभीरता से लिया है। उन्होंने कहा कि गैंगस्टर एक्ट और विशेष सुरक्षा प्रावधानों के तहत कार्यवाही तेज की जाएगी। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि आने वाले महीनों में सभी मामलों की समीक्षा और अपराधियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाएगी।

इस स्थिति ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि क्या सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की प्राथमिकताएं सही दिशा में हैं। नागरिक उम्मीद कर रहे हैं कि पुलिस कार्रवाई प्रभावी और त्वरित हो, ताकि श्रीगंगानगर को अपराध मुक्त जिला बनाया जा सके।

श्रीगंगानगर में बढ़ती अपराध प्रवृत्ति ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि सिर्फ दावे और घोषणाएं पर्याप्त नहीं हैं। अपराध को रोकने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस, सतत और तकनीकी रूप से समर्थ उपायों की आवश्यकता है।