×

पूर्व सरपंच हत्या मामले में गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई समेत 2 आरोपी बरी, 9 को सजा

 

राजस्थान के सीकर जिले में एक पूर्व सरपंच सरदार राव हत्या मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और एक अन्य आरोपी यतेंद्र को अदालत ने सभी आरोपों से बरी कर दिया। वहीं, इस मामले में कुल 11 आरोपियों में से 9 को दोषी करार दिया गया है।

अदालत ने जुराठड़ा के पूर्व सरपंच सरदार राव मर्डर केस में आज 8 साल बाद निर्णय सुनाया। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे) रेणुका हुड्डा ने दोषियों को उनके अपराध के अनुसार सजा सुनाई।

सजा की घोषणा में अदालत ने हरदेवराम, अरुण और हरविंदर को आजीवन कारावास की सजा दी है। इनके अलावा, सुनील, मुकेश, भानुप्रताप सहित अन्य 6 आरोपियों को 10 साल की सजा सुनाई गई। यह फैसला मामले में न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

अदालत ने इस पूरे मामले में साक्ष्यों, गवाहों की गवाही और जांच रिपोर्ट का गंभीरता से मूल्यांकन किया। इसके आधार पर 11 में से दो आरोपी—लॉरेंस बिश्नोई और यतेंद्र—को साक्ष्य की कमी और संदेह का लाभ देकर बरी किया गया। यह फैसला यह दिखाता है कि न्याय प्रणाली में प्रमाण और तथ्य आधारित निर्णय सर्वोपरि हैं।

पूर्व सरपंच सरदार राव की हत्या की घटना से पूरा सीकर जिला सालों तक गहमागहमी और भय के माहौल में रहा। मामला इतना गंभीर और जटिल था कि इसे सुलझाने में स्थानीय पुलिस और न्यायिक तंत्र को लंबा समय लगा। अब 8 साल बाद आए इस फैसले के बाद मामले में स्पष्टता आई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई जैसे नामी अपराधियों के खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया लंबी और जटिल हो सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि अदालत ने सभी सबूतों और गवाहों के ब्योरे की जांच कर यह सुनिश्चित किया कि दोषियों को उचित सजा मिले।

स्थानीय लोगों ने अदालत के फैसले पर मिश्रित प्रतिक्रिया दी। कुछ ने कहा कि दोषियों को सजा मिलना न्याय की जीत है, जबकि कुछ ने बरी किए गए आरोपियों के संबंध में सवाल उठाए। उन्होंने प्रशासन और पुलिस से अपील की है कि भविष्य में इस तरह के मामलों में सतर्कता और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

इस फैसले के बाद पुलिस ने कहा कि अब सभी दोषियों को उनके अपराधों के अनुसार सजा दिलवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। साथ ही बरी किए गए आरोपियों पर संपूर्ण कानूनी निगरानी जारी रहेगी।

जुड़ाठड़ा के पूर्व सरपंच सरदार राव हत्या मामले में यह फैसला इस पुराने और बहुचर्चित मामले में न्याय की दिशा में मील का पत्थर साबित हुआ है। साथ ही यह पूरे जिले और राज्य के लिए कानून और अपराध नियंत्रण की दिशा में एक स्पष्ट संदेश भी देता है।