×

BSF जवान सुल्तान सिंह को सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई, वीडियो में जाने गांव में उमड़ा जनसैलाब

 

राजस्थान के सीकर जिले के खाटूश्यामजी सदर थाना क्षेत्र के सांवलपुरा गांव में गुरुवार को शोक और गर्व का माहौल देखने को मिला, जब सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवान सुल्तान सिंह नटवाड़िया का अंतिम संस्कार पूरे सैन्य सम्मान के साथ किया गया। जवान का हाल ही में हार्ट अटैक से निधन हो गया था।पार्थिव शरीर के गांव पहुंचते ही पूरा क्षेत्र गमगीन हो गया। लोगों की आंखें नम थीं और हर तरफ “भारत माता की जय” और “सुल्तान सिंह अमर रहें” के नारे गूंज रहे थे। इससे पहले खाटूश्यामजी सदर थाना क्षेत्र से सांवलपुरा गांव तक लगभग 5 किलोमीटर लंबी तिरंगा यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण, प्रशासनिक अधिकारी और सुरक्षा बलों के जवान शामिल हुए।

<a style="border: 0px; overflow: hidden" href=https://youtube.com/embed/cPhORDHE9XM?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/cPhORDHE9XM/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden;" width="640">

गांव पहुंचने पर सुल्तान सिंह के अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। इस भावुक माहौल में उनकी मां मनकोरी देवी बार-बार अपने बेटे को याद करते हुए रोती रहीं। उन्होंने कहा, “हे मेरे बेटे सुल्तान… अरे मेरे सुल्तान… अब मैं क्या करूंगी।” उनकी यह चीखें वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर गईं।परिवार के अनुसार, सुल्तान सिंह देश की सेवा में समर्पित थे और हमेशा अपने कर्तव्य को सर्वोपरि रखते थे। अंतिम संस्कार के दौरान परिजनों ने परंपरा और भावनाओं को ध्यान में रखते हुए विशेष अनुरोध किया कि उनका अंतिम संस्कार खुले मैदान के बजाय उनके अपने खेत में किया जाए, जिसे स्वीकार किया गया।

इस दौरान जवान के छोटे भाई महेश नटवाड़िया ने उन्हें मुखाग्नि दी। सेना के जवानों ने उन्हें अंतिम सलामी दी और पूरे सैन्य सम्मान के साथ विदाई दी गई। इस अवसर पर स्थानीय प्रशासन और BSF के अधिकारी भी मौजूद रहे।गांव के लोगों ने सुल्तान सिंह को एक कर्तव्यनिष्ठ और सरल स्वभाव का जवान बताते हुए कहा कि उनकी सेवा और समर्पण हमेशा याद रखा जाएगा। कई ग्रामीणों ने कहा कि उनका जाना पूरे गांव के लिए अपूरणीय क्षति है।सैन्य सम्मान के साथ हुए इस अंतिम संस्कार ने पूरे क्षेत्र को भावुक कर दिया। जहां एक ओर गांव में शोक का माहौल था, वहीं दूसरी ओर देश के लिए उनके योगदान को लेकर गर्व की भावना भी साफ दिखाई दी। सुल्तान सिंह नटवाड़िया की अंतिम यात्रा ने एक बार फिर यह याद दिलाया कि देश की सीमाओं पर तैनात जवान किस समर्पण और त्याग के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं।