रणथंभौर में प्रदेश का पहला टाइगर रिजर्व वेटरनरी हॉस्पिटल तैयार, वीडियो में देंखे आधुनिक सुविधा से मिलेगा बाघों का बेहतर इलाज
सवाई माधोपुर के रणथंभौर टाइगर रिजर्व में अब बाघों के इलाज के लिए प्रदेश का पहला वेटरनरी हॉस्पिटल तैयार हो गया है। यह अस्पताल वेटरनरी काउंसिल ऑफ इंडिया और नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) के प्रोटोकॉल के तहत बनाया गया है। निर्माण का काम 15 महीनों में पूरा हुआ और इसे 30 लाख रुपये के बजट से तैयार किया गया।
सरकार ने बताया कि अस्पताल में अलग-अलग चरणों में साढ़े 4 करोड़ रुपए की मशीनरी और स्टाफिंग उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि बाघों के इलाज की आधुनिक और सुरक्षित सुविधा सुनिश्चित की जा सके। इस अस्पताल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि एक बार बाघ को ट्रैंकुलाइज (बेहोश) कर लाने के बाद उसे बार-बार बेहोश करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। अस्पताल में बनाए गए ट्रीटमेंट यूनिट में बाघ को छोटे पिंजरे में डालकर इंजेक्शन और दवाएं दी जा सकती हैं। इससे बाघों के इलाज की प्रक्रिया सरल और सुरक्षित होगी।
इस यूनिट में बाघ को बिना बेहोश किए भी रखा जा सकेगा और उसका इलाज किया जा सकेगा। इससे न केवल जानवर की सुरक्षा बढ़ती है, बल्कि इलाज में लगने वाला समय और संसाधन भी बचेंगे। पूर्व में टाइगर रिजर्व में बाघों के इलाज के लिए लैब टेस्ट और रिपोर्टिंग के लिए 15 दिन तक इंतजार करना पड़ता था, क्योंकि बेसिक रिपोर्ट्स के लिए उन्हें बरेली भेजना पड़ता था। नए अस्पताल में अब ये रिपोर्ट्स वहीं तैयार की जा सकेंगी, जिससे इलाज तेजी से किया जा सकेगा।
हॉस्पिटल में टाइगर रिजर्व की निगरानी और देखरेख के लिए विशेषज्ञ वेटरनरी डॉक्टर और स्टाफ तैनात होंगे। इसके अलावा, अस्पताल में इमरजेंसी इलाज, नियमित चेक-अप और संक्रमण नियंत्रण की सुविधा भी होगी। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह अस्पताल न केवल रणथंभौर के बाघों के लिए, बल्कि पूरे प्रदेश के टाइगर रिजर्व में वन्यजीव चिकित्सा और संरक्षण के लिए मील का पत्थर साबित होगा। आधुनिक उपकरण और विशेषज्ञ स्टाफ की मदद से अब बाघों का इलाज सुरक्षित, तेज और प्रभावी तरीके से किया जा सकेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि वन्यजीवों के इलाज में नई तकनीकों और सुविधाओं का होना बेहद जरूरी है। इससे न केवल बाघों की सेहत बेहतर होगी, बल्कि उनके जीवन की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। रणथंभौर टाइगर रिजर्व में यह वेटरनरी हॉस्पिटल वन्यजीव संरक्षण और चिकित्सा में नए मानक स्थापित करेगा। यह हॉस्पिटल बाघों के इलाज, चेक-अप और इमरजेंसी सेवाओं के लिए केंद्र बनेगा और पूरे प्रदेश में टाइगर के स्वास्थ्य और संरक्षण में सुधार लाएगा।
इस तरह, रणथंभौर में तैयार यह पहला टाइगर रिजर्व वेटरनरी हॉस्पिटल राज्य और देश में वन्यजीव चिकित्सा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।