×

रणथंभौर के पास अमरूद के खेत में ‘चीता केपी-2’ का मूवमेंट, वीडियो में देंखे ग्रामीणों में दहशत, वन विभाग अलर्ट

 

रणथंभौर नेशनल पार्क की सीमा से सटे कैलाशपुरी, मौजीपुरा और दुमोदा गांव के बीच पिछले कुछ दिनों से एक चीता के लगातार मूवमेंट से ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना हुआ है। यह चीता ‘केपी-2’ के नाम से पहचाना जा रहा है, जो फिलहाल क्षेत्र के एक अमरूद के खेत में डेरा डाले हुए है।

<a style="border: 0px; overflow: hidden" href=https://youtube.com/embed/KHjkSs3omk0?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/KHjkSs3omk0/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden;" width="640">

ग्रामीणों के अनुसार, चीता पिछले कई दिनों से इसी इलाके में देखा जा रहा है, जिससे दैनिक जीवन प्रभावित हुआ है। खासकर स्कूली बच्चों और किसानों को ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोग खेतों में जाने और सुबह-शाम की गतिविधियों को लेकर सतर्क हो गए हैं।

हालांकि राहत की बात यह है कि अब तक इस चीते द्वारा किसी भी इंसान या पशु पर हमले की कोई घटना सामने नहीं आई है। इसके बावजूद स्थानीय लोग लगातार भय के माहौल में जी रहे हैं और सावधानी बरत रहे हैं।

वन विभाग की टीम लगातार इस पूरे क्षेत्र पर नजर बनाए हुए है। विभागीय अधिकारियों ने मौके पर निगरानी बढ़ा दी है और ट्रैकिंग टीम को भी तैनात किया गया है ताकि चीते की गतिविधियों पर नियंत्रण रखा जा सके।

वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे बिना जरूरी काम के जंगल या खेतों की ओर न जाएं और किसी भी स्थिति में जानवर के करीब जाने की कोशिश न करें। साथ ही किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना विभाग को देने को कहा गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, जंगली जानवरों का आबादी वाले क्षेत्रों के पास आना अक्सर भोजन की तलाश या प्राकृतिक आवास में बदलाव के कारण होता है। ऐसे में सतर्कता और सही प्रबंधन बेहद जरूरी हो जाता है।

फिलहाल वन विभाग की टीम स्थिति पर नजर बनाए हुए है और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही चीते को सुरक्षित तरीके से उसके प्राकृतिक आवास की ओर वापस भेजने की कार्रवाई की जाएगी।