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रणथंभौर: मां‑बेटी टाइगर्स की टेरिटरी ‘युद्ध’ से कांप उठा जंगल!

 

17 मार्च, 2026 को एक असाधारण और रोमांचक घटना सामने आई, जिसने वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों को स्तब्ध कर दिया। जंगल के राजबाग तालाब किनारे मां‑बेटी टाइगर्स — टाइग्रेस रिद्धि (T‑124) और उसकी बेटी माही (T‑2404) — के बीच इलाका‑कब्ज़ा संघर्ष दिखाई दिया, जो स्वाभाविक रूप से जंगल की कड़ी वास्तविकता और “सर्वाइवल ऑफ द फिटेस्ट” की ताज़ा मिसाल बन गया।

रणथंभौर के ज़ोन नंबर 3 में सफारी पर गए सैलानियों ने नजारा देखा कि कैसे रिद्धि और माही अचानक आमने‑सामने आकर गर्जना और हिंसक शारीरिक भिड़ंत में जुट गईं। दोनों बाघिनों की दहाड़ जंगल में गूंज उठी और देखते ही देखते यह संघर्ष टेरेटरी (इलाक़ाई अधिकार) पर कब्ज़े की जंग में बदल गया।

बेटी की आज़ादी की कोशिश

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार रणथंभौर जैसे घने जंगल में बाघों के बीच इलाक़ाई मुकाबले होना सामान्य व्यवहार है। जब युवा टाइगर्स बड़े होकर सब‑एडल्ट अवस्था में पहुँचते हैं, तो उन्हें अपनी अलग पहचान और इलाका स्थापित करना होता है। इसी क्रम में अब माही अपनी मां रिद्धि के इलाक़े पर कब्ज़ा करने की कोशिश कर रही थी, जिससे संघर्ष की चिंगारी भड़क उठी।

माही अब अपनी पहचान और स्वतंत्र इलाका पाने के लिए तैयार है, लेकिन इस प्रक्रिया में माँ रिद्धि की चुनौती ने यह दिखा दिया कि जंगल में लड़ाई के नियम कितने कठिन हैं। दोनों बाघिनों ने एक‑दूसरे को गर्जन, पंजे‑झपटा और ताक़त का प्रदर्शन करते हुए हिरासत में लिया रखा। यह दृश्य वहां मौजूद सभी पर्यटकों के लिए एक दुर्लभ और रोमांचक अनुभव बन गया।

वन्यजीव विभाग की सक्रिय निगरानी

रणथंभौर की मशहूर टाइग्रेस रिद्धि पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रही है। इसके साथ ही माही की बढ़ती सक्रियता और अपनी माँ के सामने उतनी ताक़त दिखाने का प्रयास कई वन्यजीव प्रेमियों और विशेषज्ञों के लिए अध्ययन‑योग्य रहा। घटना के बाद से ही वन विभाग की टीम बाघिनों की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रख रही है ताकि यदि कहीं किसी तरह की गंभीर चोट या परिस्थिति बने तो समय रहते सुरक्षा उपाय अपनाए जा सकें।

विशेषज्ञों का मानना है कि रणथंभौर जैसे संरक्षित जंगल में इलाक़ाई संघर्ष व व्यवहार एक प्राकृतिक और आवश्यक प्रक्रिया है। इससे युवा टाइगर्स को अपने लिए अलग स्थान पहचानने में मदद मिलती है, लेकिन यह संघर्ष उतना ही आक्रामक और जोखिम भरा भी हो सकता है।

रणथंभौर टाइगर रिज़र्व में बाघों की संख्या बढ़ने और उन पर उपलब्ध इलाक़ों की सीमा होने के कारण ऐसे टकरावों की संख्या भी बढ़ सकती है। इसी वजह से विभाग समय‑समय पर बाघों के टेरिटोरियल व्यवहार पर अध्ययन करता है ताकि इन खुंखार बाघों के लिए स्थिर और सुरक्षित संसाधन बनाए जा सकें।

वन्यजीवों की दुनिया का कठोर सच

रणथंभौर का यह संघर्ष हमें याद दिलाता है कि जंगल केवल सुंदरता का प्रतीक नहीं, बल्कि जीवित रहने का एक कड़ा मैदान भी है, जहाँ माँ अपनी बेटी को ही चुनौती दे सकती है, और संघर्ष की आवाज़ पर्यटकों के कैमरों के सामने गूँज सकती है।