रणथंभौर में बना राजस्थान का पहला टाइगर वेटेनरी हॉस्पिटल, अब जंगल में ही होगा बाघों का हाईटेक इलाज
राजस्थान के सवाई माधोपुर स्थित रणथंभौर टाइगर रिजर्व से वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ी और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। यहां प्रदेश का पहला टाइगर रिजर्व वेटेनरी हॉस्पिटल बनकर तैयार हो गया है, जिससे अब बाघों और अन्य वन्यजीवों को अत्याधुनिक इलाज की सुविधा उनके प्राकृतिक आवास में ही मिल सकेगी।
अब जंगल में ही मिलेगा विश्वस्तरीय इलाज
अब तक रणथंभौर में बीमार या घायल बाघों के इलाज के लिए सीमित संसाधन ही उपलब्ध थे और अक्सर विशेषज्ञ सुविधाओं की कमी महसूस की जाती थी। लेकिन नए वेटेनरी हॉस्पिटल के बनने से अब वन्यजीवों को आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं सीधे जंगल के भीतर ही मिलेंगी। इससे इलाज में देरी कम होगी और जानवरों की जान बचाने की संभावना बढ़ेगी।
24 घंटे में फोरेंसिक रिपोर्ट
इस अस्पताल की सबसे बड़ी खासियत इसकी अत्याधुनिक लैब है। पहले वन्यजीवों के सैंपल जांच के लिए उत्तर प्रदेश के बरेली भेजे जाते थे, जहां रिपोर्ट आने में कई दिन या महीने लग जाते थे। अब यही जांच रणथंभौर में ही होगी और रिपोर्ट महज 24 घंटे के भीतर उपलब्ध हो जाएगी। इससे बीमारियों की पहचान और उपचार तेज होगा।
बिना बेहोश किए होगा बाघों का इलाज
नई सुविधा के तहत अस्पताल परिसर में विशेष एनक्लोजर (बाड़े) बनाए गए हैं, जहां बाघों को बिना बार-बार बेहोश किए ऑब्जर्वेशन में रखा जा सकेगा। पहले इलाज के लिए बार-बार ट्रैंकुलाइज (बेहोश) करना पड़ता था, जिससे उनके स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ता था। अब इस नई तकनीक से यह जोखिम कम हो जाएगा।
आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा अस्पताल
करीब 4.5 करोड़ रुपये के बजट से विकसित इस प्रोजेक्ट में अस्पताल को डिजिटल एक्स-रे, पोस्टमार्टम यूनिट, ट्रीटमेंट सेंटर और छोटे वन्यजीवों के लिए विशेष पिंजरों जैसी सुविधाओं से लैस किया जा रहा है। अस्पताल का निर्माण रणथंभौर के जोन-6 क्षेत्र में किया गया है, जो रणनीतिक रूप से वन्यजीवों तक आसान पहुंच सुनिश्चित करता है।
वन्यजीव संरक्षण को मिलेगा बड़ा फायदा
रणथंभौर देश के प्रमुख टाइगर रिजर्व में से एक है, जहां बाघों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में यह अस्पताल न केवल बीमार और घायल बाघों के इलाज में मदद करेगा, बल्कि वन्यजीवों से इंसानों में फैलने वाली बीमारियों (ज़ूनोटिक डिजीज) की पहचान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
पहले सामने आ चुकी हैं चुनौतियां
हाल ही में रणथंभौर में एक बाघिन की मौत ब्लड इंफेक्शन से होने की आशंका जताई गई थी, जिससे समय पर इलाज और जांच की जरूरत और अधिक महसूस हुई। ऐसे मामलों में यह नया अस्पताल भविष्य में बड़ी भूमिका निभा सकता है।