लोकसभा में हनुमान बेनीवाल की मांग: गंभीर और दुर्लभ बीमारियों की दवाएं हों मुफ्त
लोकसभा में को राजस्थान के नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल ने गंभीर और दुर्लभ बीमारियों से जुड़ा अहम मुद्दा उठाया। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि ऐसी बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली महंगी दवाओं और इंजेक्शनों को मरीजों के लिए मुफ्त या सस्ती दरों पर उपलब्ध कराया जाए।
सांसद बेनीवाल ने सदन में सवाल उठाते हुए कहा कि स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी और मस्कुलर डिस्ट्रॉफी जैसी आनुवंशिक बीमारियों का इलाज बेहद महंगा है। इन बीमारियों से पीड़ित मरीजों को जिन इंजेक्शनों और दवाओं की जरूरत होती है, उनकी कीमत करोड़ों रुपये तक पहुंच जाती है। उन्होंने बताया कि कई मामलों में इन इंजेक्शनों की कीमत करीब 10 करोड़ रुपये तक होती है, जो सामान्य परिवारों के लिए वहन करना लगभग असंभव है।
बेनीवाल ने यह भी कहा कि इन दवाओं और इंजेक्शनों का उत्पादन अभी मुख्य रूप से विदेशों में होता है और इन्हें भारत में आयात करना पड़ता है। इसके कारण उनकी कीमत और अधिक बढ़ जाती है। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या ऐसी दवाओं का उत्पादन देश में शुरू करने की कोई योजना है, ताकि इनकी लागत कम की जा सके और मरीजों को राहत मिल सके।
नागौर सांसद ने सरकार से यह भी आग्रह किया कि गंभीर और दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे गरीब मरीजों के लिए विशेष योजना बनाई जाए, जिसके तहत उन्हें जीवनरक्षक दवाएं और इंजेक्शन मुफ्त या रियायती दरों पर उपलब्ध कराए जाएं। उनका कहना था कि कई परिवार इलाज के भारी खर्च के कारण आर्थिक संकट में आ जाते हैं और कई बार मरीजों को समय पर उपचार भी नहीं मिल पाता।
उन्होंने सरकार से यह भी जानना चाहा कि क्या केंद्र सरकार ऐसी बीमारियों के इलाज के लिए कोई विशेष फंड या सहायता योजना चला रही है, जिससे जरूरतमंद मरीजों को मदद मिल सके।
लोकसभा में उठाए गए इस मुद्दे को स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ा बेहद महत्वपूर्ण विषय माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि दुर्लभ बीमारियों के इलाज की लागत कम करने और दवाओं के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने से लाखों मरीजों को राहत मिल सकती है।
अब इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर सभी की नजर बनी हुई है। सांसद बेनीवाल की यह मांग दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे मरीजों और उनके परिवारों के लिए उम्मीद की किरण मानी जा रही है।