भगवान को पालकी में बैठाकर करवाया मंदिर में प्रवेश
इसके साथ ही बच्चों के साज-सज्जा, कपड़े, कान छिदवाना, नामकरण, मधु-पालन, गोद लेना और बच्चों के खेल-कूद के भी कार्यक्रम होते थे। दोपहर में बाल्यकाल का वर्णन, विवाह, षट्कर्म उपदेश, राज्याभिषेक, अंक-अक्षर ज्ञान, नीलांजना नृत्य, वैराग्य और भगवान को पालकी में बिठाकर मंदिर में प्रवेश का कार्यक्रम हुआ। सौधर्म इंद्र, भगवान के माता-पिता और कुबैर इंद्र सहित चांदी के बाड़े से वाद्ययंत्रों के साथ आरती की गई। भगवान के द्रव्य पूज्य सोहनलाल, भागचंद, मनीष एवं कला परिवार का सम्मान किया गया।
वात्सल्य भोज के आयोजन का सौभाग्य फूलचंद मैना देवी, वीरेंद्र-संगीता, विनोद-सोनाली पाटनी परिवार एवं भागचंद, मनीष काला परिवार को प्राप्त हुआ। समाज के रमेशचंद्र जैन ने बताया कि शुक्रवार सुबह दैनिक अभिषेक व पूजा-अर्चना के साथ विविध अनुष्ठान का आयोजन किया जाएगा। दोपहर 2 बजे भगवान को शिखर पर विराजमान किया जाएगा, जहां ध्वजा भी फहराई जाएगी। साथ ही आचार्य श्री चैत्य सागर का शुभ आशीर्वाद भी प्राप्त होगा। साथ ही दोपहर 3 बजे जुलूस निकाला जाएगा।