राजस्थान में बदली सदियों पुरानी परंपरा, फुटेज में देंखे नागौर में पहली बार बेटी बनी परिवार की उत्तराधिकारी; 10 साल की भाविका का हुआ 'पाग दस्तूर'
राजस्थान की पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था में पिता के निधन के बाद परिवार के बड़े बेटे या पुरुष उत्तराधिकारी को 'पाग दस्तूर' की रस्म निभाकर परिवार की विरासत सौंपी जाती है। लेकिन नागौर जिले के रियांबड़ी पंचायत समिति के सुरियास गांव में इस परंपरा को नई दिशा देते हुए पहली बार एक बेटी को परिवार का उत्तराधिकारी घोषित किया गया। यह फैसला परिवार की मां और दादी की पहल पर लिया गया, जिसकी पूरे क्षेत्र में चर्चा हो रही है।
दरअसल, सुरियास गांव निवासी कानसिंह राठौड़ का 15 जुलाई को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था। उनके परिवार में पत्नी और 10 वर्षीय इकलौती बेटी भाविका कंवर (बिट्टू) हैं। पिता के निधन के बाद रविवार को बारहवें की रस्म निभाई गई।परंपरा के अनुसार, परिवार में पुत्र नहीं होने पर किसी निकट संबंधी को दत्तक लेकर उसका पाग दस्तूर करने की चर्चा चल रही थी। लेकिन इसी बीच परिवार की महिलाओं ने वर्षों पुरानी परंपरा को बदलने का फैसला लिया। मां और दादी ने तय किया कि परिवार की विरासत और जिम्मेदारी अब किसी और को नहीं, बल्कि भाविका कंवर को सौंपी जाएगी।इसके बाद गांव में पहली बार एक बेटी का पाग दस्तूर किया गया और उसे परिवार का उत्तराधिकारी घोषित किया गया। इस अवसर पर मौजूद परिजनों और ग्रामीणों ने भी इस फैसले का स्वागत किया।
परंपरा के साथ बदलाव का संदेश
राजस्थान में पाग दस्तूर केवल एक रस्म नहीं, बल्कि परिवार की जिम्मेदारी और उत्तराधिकार का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में एक बेटी को यह सम्मान मिलना सामाजिक बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।ग्रामीणों का कहना है कि समय के साथ समाज में बेटियों की भूमिका लगातार मजबूत हुई है। ऐसे में उन्हें परिवार की जिम्मेदारियां सौंपना और समान अधिकार देना सकारात्मक बदलाव का संकेत है।
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ को मिली नई मिसाल
सुरियास गांव की यह पहल 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' और महिला सशक्तिकरण के संदेश को भी मजबूत करती है। परिवार का कहना है कि भाविका ही उनके परिवार की एकमात्र संतान है, इसलिए वही अपने पिता की विरासत की असली हकदार है।यह फैसला न केवल परिवार के लिए भावनात्मक रहा, बल्कि पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया। सामाजिक जानकारों का मानना है कि इस तरह की पहलें बेटियों के प्रति समाज की बदलती सोच को दर्शाती हैं और समान अधिकार की भावना को आगे बढ़ाती हैं।नागौर के सुरियास गांव में पहली बार बेटी का पाग दस्तूर होना अब एक नई सामाजिक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है, जो परंपराओं के साथ सकारात्मक बदलाव और लैंगिक समानता का संदेश देता है।