लखनऊ यूनिवर्सिटी असिस्टेंट प्रोफेसर पर छात्रा को ‘पेपर आउट’ कराने और उत्पीड़न का आरोप, गिरफ्तारी का वीडियो आया सामने
University of Lucknow से जुड़ा एक नया विवाद सामने आया है, जिसने विश्वविद्यालय प्रशासन और शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि विश्वविद्यालय के एक असिस्टेंट प्रोफेसर ने बीएससी फाइनल ईयर की एक छात्रा को फोन कर छुट्टी से जल्दी वापस आने का दबाव बनाया और परीक्षा का पेपर पहले से उपलब्ध कराने की बात कही।
सोशल मीडिया और छात्र संगठनों के बीच वायरल हो रहे एक कथित ऑडियो क्लिप में प्रोफेसर और छात्रा के बीच बातचीत सुनाई दे रही है। ऑडियो में प्रोफेसर छात्रा से कहते हैं, “डार्लिंग, तुम्हारे लिए पेपर आउट करा दिया है। एग्जाम से पहले घर से आ जाओ। यहां पेपर तुम्हें दे देते हैं।” इस कथित बातचीत ने विश्वविद्यालय परिसर में हड़कंप मचा दिया है।
ऑडियो के मुताबिक, प्रोफेसर छात्रा से उसकी मां की तबीयत के बारे में भी पूछते हैं। वह कहते हैं, “बच्चा, मम्मा ठीक हैं?” इस पर छात्रा जवाब देती है कि “हां, ठीक हैं।” इसके बाद प्रोफेसर उसे छुट्टी बीच में छोड़कर जल्दी वापस आने के लिए कहते हैं। शुरुआत में छात्रा आने से मना करती है, लेकिन बाद में दबाव में आने की बात मान लेती है।
हालांकि, फोन कटने के बाद कथित ऑडियो में छात्रा की आवाज भी सुनाई देती है, जिसमें वह कहती है, “ये मुझे बुला रहे हैं। मुझे पेपर नहीं चाहिए। मुझे फिर से मोलेस्ट करना चाहते हैं।” इस बयान के सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है। छात्रा ने अप्रत्यक्ष रूप से प्रोफेसर पर पहले भी उत्पीड़न करने का आरोप लगाया है।
मामले के सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है। छात्र संगठनों ने आरोपित प्रोफेसर के खिलाफ तत्काल जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है। कई छात्रों ने कैंपस में प्रदर्शन कर निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।
फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से आधिकारिक बयान का इंतजार किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, मामले की प्रारंभिक जांच शुरू कर दी गई है और ऑडियो की सत्यता की जांच कराई जा सकती है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित प्रोफेसर के खिलाफ अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
इस घटना ने एक बार फिर विश्वविद्यालय परिसरों में छात्राओं की सुरक्षा और परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता को लेकर चिंता बढ़ा दी है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी शिक्षक द्वारा परीक्षा पेपर लीक कराने या छात्रा पर निजी दबाव बनाने जैसे आरोप सही साबित होते हैं, तो यह शिक्षा व्यवस्था के लिए बेहद गंभीर मामला होगा।