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मुकंदरा टाइगर रिजर्व में बाघिन का आगमन, वीडियो में जाने जंगल प्रेमियों में खुशी की लहर

 

राजस्थान के मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के लिए खुशखबरी है। मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से एक बाघिन को मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में शिफ्ट किया गया है। केंद्रीय पर्यावरण और वन विभाग की टीम ने आज सुबह 8:30 बजे बाघिन को झामरा घाटी स्थित एक हेक्टेयर के सॉफ्ट एंक्लोजर में रिलीज किया।

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मुख्य वन संरक्षक सुगनाराम जाट ने बताया कि बाघिन की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। विभाग की टीम रेडियो कॉलर के जरिए 24 घंटे बाघिन की मॉनिटरिंग करेगी। प्रारंभिक स्वास्थ्य परीक्षण और बर्ताव के अध्ययन के बाद ही उसे बड़े एनक्लोजर में स्थानांतरित किया जाएगा।

इस शिफ्ट का उद्देश्य मुकंदरा टाइगर रिजर्व में बाघों की नस्ल को मजबूत करना और क्षेत्र में जैव विविधता को बनाए रखना है। विशेषज्ञों का कहना है कि अन्य रिजर्व से बाघों को शिफ्ट करना उनकी आनुवंशिक विविधता और प्रजनन क्षमता को बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण कदम है।

यह दूसरा मामला है जब राजस्थान में अन्य प्रदेश से बाघ को शिफ्ट किया गया है। इससे पहले दिसंबर 2025 में मध्य प्रदेश के पेंच टाइगर रिजर्व से एक बाघिन को रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में लाया गया था। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रयास राजस्थान के बाघों की नस्ल सुधार और जंगलों में प्रजनन दर बढ़ाने के लिए अहम साबित होगा।

वन विभाग ने बताया कि मुकंदरा टाइगर रिजर्व में बाघिन के लिए आवश्यक सभी व्यवस्थाएं पहले से पूरी की गई थीं। इसमें खाने-पीने, शिकार और सुरक्षा की व्यवस्थाएं शामिल हैं। बाघिन को धीरे-धीरे जंगल के वातावरण में ढलने का समय दिया जाएगा, ताकि वह नए निवास स्थान में सहज महसूस कर सके।

इस शिफ्टिंग प्रक्रिया के दौरान पर्यावरण प्रेमियों और वन्यजीव प्रेमियों में खुशी की लहर देखने को मिली। उन्होंने इसे राजस्थान के संरक्षण प्रयासों में एक बड़ी सफलता बताया। वन्यजीव अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के कदमों से न केवल बाघों की संख्या में सुधार होगा, बल्कि क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र को भी मजबूती मिलेगी।

विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि रेडियो कॉलर और मॉनिटरिंग तकनीक की मदद से बाघिन की गतिविधियों, स्वास्थ्य और शिकार व्यवहार पर लगातार नजर रखी जाएगी। इससे भविष्य में किसी भी समस्या का तुरंत समाधान किया जा सकेगा।

इस प्रकार, मुकंदरा टाइगर रिजर्व में बाघिन का आगमन न केवल वन्यजीव संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि राजस्थान के जंगलों में बाघों की संख्या और उनकी आनुवंशिक विविधता को बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाएगा। वन्यजीव प्रेमियों और अधिकारियों ने इसे राज्य में बाघ संरक्षण के क्षेत्र में ऐतिहासिक कदम बताया है।