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अभेडा बायोलॉजिकल पार्क के बाघ-बाघिन को मिलेगा खुला जंगल, वीडियो में देंखे एनक्लोजर से रिलीज की अनुमति

 

राजस्थान के अभेडा बायोलॉजिकल पार्क से पिछले साल रामगढ़ और मुकंदरा में शिफ्ट किए गए बाघ-बाघिन को अब एनक्लोजर से छुटकारा मिलने जा रहा है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) ने दोनों बाघों को खुला जंगल में घूमने की अनुमति दे दी है। इससे बाघ-बाघिन अब अपने प्राकृतिक वातावरण में स्वतंत्र रूप से जीवन व्यतीत कर सकेंगे।

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मुख्य वन संरक्षक (CCF) सुगनाराम जाट ने बताया कि एनटीसीए की 17वीं तकनीकी समिति के निर्णयानुसार, मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में बाघिन MT-7 को वर्तमान 5 हेक्टेयर एनक्लोजर से बड़े 21 हेक्टेयर एनक्लोजर में रिलीज किया जाएगा। इसका उद्देश्य बाघिन को किसी भी प्रकार के बाहरी व्यवधान से सुरक्षित रखना है और उसे प्राकृतिक व्यवहार अपनाने का अवसर देना है।

समान रूप से, रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में नर बाघ RVT-7 को भी वर्तमान एनक्लोजर से बड़े एरिया में रिलीज किया जाएगा। इससे दोनों बाघों को अपने लिए पर्याप्त शिकार और स्थान सुनिश्चित होगा और वे जंगल के स्वाभाविक पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा बनेंगे।

अधिकारियों का कहना है कि बाघ-बाघिन को बड़े एनक्लोजर में छोड़ने से उनके शिकार, सामाजिक व्यवहार और जंगल में नेविगेशन क्षमता को भी मजबूत किया जा सकेगा। यह कदम वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के अनुसार, इस तरह के रिलीज़ कार्यक्रम बाघों के प्राकृतिक व्यवहार और प्रजनन क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं। एनक्लोजर में लंबे समय तक रहने से बाघों की गतिविधियां सीमित हो जाती हैं, जबकि बड़े जंगल में छोड़ने से उनका स्वाभाविक जीवन चक्र बनाए रखना संभव होता है।

वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि यह पहल राजस्थान के बाघ संरक्षण प्रयासों में नया अध्याय जोड़ती है। यह न केवल बाघों की संख्या बढ़ाने में मदद करेगी, बल्कि जंगल और मानव जीवन के बीच सामंजस्य बनाए रखने में भी सहायक होगी।

इससे पहले बाघ-बाघिन को अभेडा बायोलॉजिकल पार्क से शिफ्ट करने का उद्देश्य उन्हें सुरक्षित वातावरण और बेहतर देखभाल प्रदान करना था। अब एनटीसीए की मंजूरी के बाद, उन्हें खुली जगह में छोड़कर उनकी प्राकृतिक स्वतंत्रता सुनिश्चित की जाएगी।

वन विभाग ने कहा कि रिलीज़ के दौरान पूरी सुरक्षा व्यवस्था की जाएगी। बाघ-बाघिन की निगरानी के लिए अधिकारियों और वन रक्षकों की टीम लगातार सक्रिय रहेगी। इसके साथ ही, आसपास के क्षेत्रों में ग्रामीणों को जागरूक किया जाएगा ताकि बाघों के नए एरिया में प्रवेश के दौरान किसी प्रकार की हानि या दुर्घटना न हो।

इस पहल से राजस्थान में बाघ संरक्षण और प्रबंधन के प्रति लोगों में जागरूकता भी बढ़ेगी। वन्यजीव प्रेमी और संरक्षणकर्मी इसे राज्य में वन्य जीवन के संरक्षण के लिए अहम कदम मान रहे हैं। बाघ-बाघिन के एनक्लोजर से रिलीज़ होने के बाद, उनकी स्वतंत्रता और जंगल में प्राकृतिक जीवन की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक कदम साबित होगा।