×

कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री कोटा में गरजे, वीडियो में देखें बोले - गाय, गंगा और गुरु की रक्षा से बचेगा सनातन, ‘बेटियों से कह दो बुर्के वाली मत बनना

 

कथावाचक आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने सनातन धर्म और सामाजिक मूल्यों को लेकर एक बार फिर अपने बयानों से सुर्खियां बटोरी हैं। एक धार्मिक कथा के दौरान उन्होंने कहा कि समाज और सनातन धर्म की रक्षा के लिए पांच प्रमुख स्तंभों—गाय, गंगा, गुरु, गायत्री और गीता—की रक्षा करना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि यदि इन पांचों की रक्षा कर ली जाए, तो सनातन धर्म को कोई समाप्त नहीं कर सकता और समाज भी सुरक्षित रहेगा।

<a style="border: 0px; overflow: hidden" href=https://youtube.com/embed/KB6bUzFYMqI?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/KB6bUzFYMqI/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden;" width="640">

धीरेंद्र शास्त्री ने अपने संबोधन में कहा, “हमें गाय की सेवा करनी है। गाय, गंगा, गुरु, गायत्री और गीता—इन पांचों की रक्षा कर ली तो अपने सनातन की रक्षा अपने आप हो जाएगी। समाज बचेगा, संस्कृति बचेगी।” उन्होंने आगे कहा कि वह इन पांचों के साथ एक और विषय जोड़ना चाहते हैं, और वह है बेटियों की सुरक्षा।

कथावाचक ने कहा कि समाज को बेटियों की रक्षा के लिए भी संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने बेटियों को लेकर अपनी बात रखते हुए कहा कि उन्हें हर प्रकार के गलत प्रभाव से बचाया जाना चाहिए। उन्होंने मंच से यह भी कहा कि बेटियों को मजबूत और आत्मनिर्भर बनना चाहिए। उनके इस बयान के बाद कार्यक्रम में मौजूद श्रद्धालुओं ने तालियां बजाकर समर्थन जताया।

इस धार्मिक आयोजन में योग गुरु बाबा रामदेव भी शामिल हुए। मंच से संबोधित करते हुए बाबा रामदेव ने भी सनातन धर्म और गोसेवा को लेकर तीखे बयान दिए। उन्होंने कहा कि जो लोग केवल गोमाता की रक्षा की बात करते हैं, लेकिन वास्तव में कोई सेवा या प्रयास नहीं करते, वे सनातन धर्म के नाम पर कलंक हैं। बाबा रामदेव ने कहा, “जो लोग कहते हैं कि गोमाता को राष्ट्रमाता बनाया जाए, लेकिन स्वयं कुछ नहीं करते, वे सिर्फ बातें कर रहे हैं। ऐसे लोग सनातन के नाम पर कलंक हैं।”

बाबा रामदेव ने आगे कहा कि गोसेवा केवल नारों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसके लिए ठोस प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे गोसेवा के लिए समय, संसाधन और श्रम दें, तभी समाज में सकारात्मक बदलाव संभव है।

अपने संबोधन के दौरान बाबा रामदेव ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जो लोग अपने बच्चों को गुरुकुल शिक्षा प्रणाली में नहीं भेजते, वे अपनी सांस्कृतिक जड़ों से दूर हो रहे हैं। उनके इस बयान पर भी कार्यक्रम में मौजूद लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली।

धीरेंद्र शास्त्री और बाबा रामदेव के बयानों के बाद यह कार्यक्रम चर्चा का विषय बन गया है। जहां उनके समर्थक इन विचारों को सनातन धर्म और संस्कृति की रक्षा से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं आलोचक इन बयानों को विवादास्पद बता रहे हैं।

फिलहाल, इस धार्मिक आयोजन में दिए गए बयानों को लेकर सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर बहस तेज हो गई है। आयोजकों का कहना है कि इस कथा का उद्देश्य समाज को जागरूक करना और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति लोगों को संवेदनशील बनाना था।