कोटा में धीरेंद्र शास्त्री का बयान, सनातन का हास-परिहास न हो, वीडियो में देंखे दोनों पक्ष बैठकर निकालें बीच का रास्ता
राजस्थान के कोटा जिले में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने प्रयागराज में शंकराचार्य से जुड़ी हालिया घटना को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। रामगंजमंडी में आयोजित श्रीराम कथा के समापन के बाद शुक्रवार को मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें प्रयागराज की घटना की पूरी जानकारी नहीं है। वह स्वयं प्रयागराज नहीं जा पाए हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर जो कुछ देखा है, उसके आधार पर इतना जरूर कहना चाहेंगे कि सनातन धर्म का हास-परिहास नहीं होना चाहिए।
धीरेंद्र शास्त्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस विवाद से जुड़े दोनों पक्ष उनके अपने हैं और दोनों ही सनातनी हैं। ऐसे में किसी तरह के टकराव या सार्वजनिक बयानबाजी से सनातन धर्म की छवि को नुकसान पहुंचता है। उन्होंने कहा, “दोनों पक्ष हमारे अपने हैं। दोनों सनातनी हैं। मेरा आग्रह है कि दोनों आपस में बैठकर बात करें, समझौता करें और बीच का रास्ता निकालें। सनातन का हंसी-मजाक बनाने से किसी का भला नहीं होने वाला।”
उन्होंने यह भी कहा कि आज के समय में सोशल मीडिया के जरिए छोटी-छोटी बातों को बड़ा विवाद बना दिया जाता है, जिससे समाज में भ्रम और तनाव की स्थिति पैदा होती है। ऐसे मामलों में संयम और संवाद ही सबसे बेहतर समाधान है।
इससे पहले रामगंजमंडी में चल रही श्रीराम कथा के दौरान आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने हनुमान जी के चरित्र का विस्तार से वर्णन किया। कथा के दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं को भक्ति, सेवा और राष्ट्र के प्रति समर्पण का संदेश दिया। कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और भजनों व प्रवचनों के माध्यम से धार्मिक माहौल बना रहा।
श्रीराम कथा के मंच से धीरेंद्र शास्त्री ने गोमाता संरक्षण का भी जोरदार आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि हिंदुओं को देश बचाना है, तो सबसे पहले गाय को बचाना होगा। उन्होंने नारा देते हुए कहा, “हिंदुओं, तुम्हें देश बचाना है तो पहले गाय बचानी पड़ेगी। गोशाला नहीं उपाय, एक हिंदू एक गाय।” उन्होंने कहा कि गाय केवल गोशालाओं के भरोसे नहीं बचेगी, बल्कि उसे प्राचीन भारतीय पद्धतियों के अनुसार घर-घर में संरक्षण देना होगा।
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि गाय भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का मूल आधार है। गाय के संरक्षण से ही समाज, संस्कृति और संस्कार सुरक्षित रह सकते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे गोसेवा को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं और इसे केवल दिखावे तक सीमित न रखें।
मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि सनातन धर्म की ताकत उसकी एकता में है। आपसी मतभेदों को सार्वजनिक विवाद बनाने के बजाय आपस में बैठकर सुलझाया जाना चाहिए। इससे न केवल समाज में सकारात्मक संदेश जाएगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक मजबूत उदाहरण प्रस्तुत होगा।
कुल मिलाकर, कोटा दौरे के दौरान आचार्य धीरेंद्र शास्त्री का संदेश साफ रहा—सनातन धर्म का सम्मान बना रहे, आपसी विवादों को संवाद से सुलझाया जाए और गाय व संस्कृति के संरक्षण को प्राथमिकता दी जाए।