×

कोटा में दो प्रसूताओं की मौत के बाद बड़ा एक्शन, वीडियो में जाने 24 दवाइयों और उपकरणों पर रोक, ड्रग कंट्रोल विभाग सख्त

 

राजस्थान के कोटा जिले में सीजेरियन डिलीवरी के बाद दो प्रसूताओं की मौत के मामले ने स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा दिया है। घटना के बाद राज्य के ड्रग कंट्रोल विभाग ने सख्त कदम उठाते हुए उन दवाइयों और मेडिकल उपकरणों के उपयोग पर तत्काल रोक लगा दी है, जिनका उपयोग संबंधित मामलों में किया गया था।यह मामला Kota Medical College के गायनी वार्ड से जुड़ा बताया जा रहा है, जहां हाल ही में सिजेरियन डिलीवरी के बाद दो महिलाओं की तबीयत बिगड़ने से उनकी मौत हो गई थी। प्रारंभिक जांच के बाद ड्रग कंट्रोल विभाग ने इसे गंभीर मानते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है।

<a style="border: 0px; overflow: hidden" href=https://youtube.com/embed/eVl_KB5OomA?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/eVl_KB5OomA/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden;" width="640">

ड्रग कंट्रोल विभाग ने कुल 24 प्रकार की दवाइयों और मेडिकल उपकरणों के उपयोग और सप्लाई पर रोक लगा दी है। यह रोक तत्काल प्रभाव से लागू की गई है और अगले आदेश तक जारी रहेगी। विभाग का कहना है कि यह कदम एहतियातन उठाया गया है ताकि किसी भी संभावित जोखिम की जांच पूरी तरह की जा सके।राज्य के ड्रग कंट्रोलर Ajay Phatak ने इस संबंध में अलग-अलग पत्र जारी किए हैं। इन पत्रों में Rajasthan Medical Services Corporation Ltd और प्रदेश के सभी दवा विक्रेताओं को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि सूचीबद्ध दवाइयों की सप्लाई फिलहाल तत्काल प्रभाव से बंद कर दी जाए।

अधिकारियों के अनुसार, जिन दवाइयों और उपकरणों पर रोक लगाई गई है, उनका उपयोग गायनी वार्ड में प्रसव के दौरान या उसके बाद मरीजों के इलाज में किया गया था। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि मौत का सीधा कारण दवाइयों का उपयोग था या कोई अन्य चिकित्सकीय जटिलता।ड्रग कंट्रोल विभाग ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए दवाइयों की गुणवत्ता, बैच नंबर और सप्लाई चेन की भी जांच शुरू कर दी है। साथ ही संबंधित अस्पताल प्रशासन से भी विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सिजेरियन डिलीवरी के बाद जटिलताएं कई कारणों से हो सकती हैं, जिनमें संक्रमण, दवाओं की प्रतिक्रिया या अन्य मेडिकल कंडीशन शामिल हैं। ऐसे में पूरी जांच के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है।इस घटना के बाद अस्पताल प्रशासन और चिकित्सा विभाग पर भी सवाल उठने लगे हैं। परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है और मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

फिलहाल राज्य सरकार ने भी मामले पर नजर बनाए रखी है और संबंधित अधिकारियों को विस्तृत रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यह मामला न केवल कोटा बल्कि पूरे राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और दवा सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।